एम्स ने अपने 107 एकड़ में फैले पूर्व अंसारी नगर परिसर और 30 एकड़ में फैले मस्जिद मोठ परिसर का पुनर्विकास करने की योजना तैयार की है। एम्स की परियोजना स्थल पर करीब 5995 पेड़ हैं, जिनमें से 4125 पेड़ों (66.8%) को काटने या इन्हें प्रतिरोपित करने का प्रस्ताव रखा गया है। एम्स के इस प्रस्ताव पर दिल्ली राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) ने चिंता व्यक्त की है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की पुनर्विकास परियोजना के लिए हजारों पेड़ों को काटने का प्रस्ताव रखा गया है। एम्स के इस प्रस्ताव पर दिल्ली राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) ने चिंता व्यक्त की है। एसईएसी ने एम्स से कहा है कि वह अपनी परियोजना की समीक्षा करे और कम से कम 50 फीसदी पेड़ों को बचाने का प्रयास करें।
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एम्स ने अपने 107 एकड़ में फैले पूर्व अंसारी नगर परिसर और 30 एकड़ में फैले मस्जिद मोठ परिसर का पुनर्विकास करने की योजना तैयार की है। साथ ही 14.95 एकड़ के फैले ट्रॉमा सेंटर एक्सटेंशन परिसर का भी विकास करने का खाका बनाया है। इधर राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) ने एम्स की इस विकास परियोजना को ध्यान में रखते हुए मार्च में अपनी कुछ शर्तें रखी थीं।
इसी संदर्भ में तीन जून को एसईआईएए ने एसईएसी के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में एसईएसी की तरफ से जानकारी दी गई कि एम्स की परियोजना स्थल पर करीब 5995 पेड़ हैं, जिनमें से 4125 पेड़ों (66.8%) को काटने या इन्हें प्रतिरोपित करने का प्रस्ताव रखा गया है। पेड़ों को काटने या फिर प्रतिरोपित करने का यह प्रतिशत बहुत बड़ा है। इसलिए एम्स को अपनी विकास परियोजना के मास्टर प्लान की समीक्षा करने के लिए कहा है।
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एसईएसी ने कहा है जल्द ही वह अपनी उप समिति के माध्यम से एक बार फिर से एम्स की विकास परियोजना स्थलों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद जो भी निष्कर्ष निकलेगा उसकी एक प्रति एम्स को भेजेंगे और उनसे प्रतिक्रिया भी लेंगे।