ममता गौतम का कहना है कि उन्होंने नवरात्र में पूरे नौ दिन के व्रत रखे हैं। रोज भगवान की पूजा करती हैं। भगवान राम में उनकी अटूट आस्था है। इसके बावजूद पूरे मामले को इस तरह से रंग दिया गया जैसे उन्होंने श्रीराम का नारा लगने का विरोध किया। निलंबित की गईं दूसरी प्रोफेसर श्वेता शर्मा का कहना है कि इस प्रकरण से उन्हें काफी दुख पहुंचा है। यह मामला ऐसा नहीं था जिसे इतना तूल दिया जाता। अब इस पर विराम लगना चाहिए। इस मामले में कॉलेज के निदेशक डॉ. संजय कुमार सिंह ने बताया कि उच्चस्तरीय जांच की जा रही है।
यह था मामला
कालेज के इंडक्शन कार्यक्रम में अपनी परफोरमेंस से पहले एक छात्र ने जय श्रीराम का नारा लगा दिया। इस पर प्रोफेसर ममता गौतम और श्वेता शर्मा ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उसे मंच से नीचे उतार दिया। कुछ छात्रों ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की और हंगामा प्रदर्शन किया। पूरे प्रकरण का वीडियो तेजी से वायरल हो गया। भाजपा के सांसद और विधायक छात्र के पक्ष में आ गए। इसके बाद काॅलेज प्रबंधन ने जांच रिपोर्ट का हवाला देकर दोनों प्रोफेसर को निलंबित कर दिया।
छात्र ने कहा, मेरे खिलाफ बनाया जा रहा माहौल
जय श्रीराम का नारा लगाने पर जिस छात्र को मंच से नीचे उतारा गया, उसका कहना है कि उसके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। उसे डर है कि कहीं उसका कोई नुकसान न हो जाए। उसने सफाई दी है कि उसका नारा लगाने का कोई इरादा नहीं था। वह जब मंच पर पहुंचा तो सामने बैठे छात्रों ने जोर से जय श्रीराम का नारा लगाया। उसने उनकी प्रतिक्रिया में जय श्रीराम बोला था। इस पर उसे मंच से उतार दिया गया। इसके बाद जैसे ही इस मामले का वीडियो वायरल हुआ, कॉलेज के कई प्रोफेसरों ने उससे जबरन माफीनामा लिखवाया। प्रोफेसरों ने उसका फोन भी छीन लिया। छात्र ने बताया कि अभी तो कोई समस्या नहीं है लेकिन 25 अक्टूबर को कॉलेज खुलने के बाद परेशानी खड़ी हो सकती है।
छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई
प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों प्रोफेसर को निलंबित किया गया है। इस मामले में छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी। न ही उनकी पढ़ाई प्रभावित होने दी जाएगी।