अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बिल्डर-खरीदार मामले को केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रस्तावित नई कमेटी सुलझाएगी। जानकारों की मानें तो प्रदेश सरकार की पुरानी कमेटी और मंत्री समूह की संस्तुति कोई बड़ा असर नहीं कर पाई। अब नई कमेटी पर पूरा दारोमदार होगा।
दरअसल यूपी में नई सरकार बनने के बाद बिल्डर-खरीदार मामले के हल के लिए यूपी शासन ने राहुल भटनागर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। इसमें तीनों प्राधिकरण के सीईओ बतौर सदस्य शामिल हुए थे। उस कमेटी को प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी और बिल्डर-खरीदार समस्या के संबंध में अपना सुझाव देने को कहा गया था। उस कमेटी ने चार पन्ने का सुझाव शासन को दिया।
रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुरेश खन्ना के नेतृत्व में मंत्री मंडल की एक समिति बना दी। इसमें मंत्री सतीश महाना और सुरेश राणा को भी रखा गया। इस कमेटी ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा का कई बार दौरा किया और जनता के अलावा प्राधिकरण और बिल्डर से कई दौर की बातचीत की
मंत्री समूह ने तीन बिंदुओं पर दी थी संस्तुति
अभी एक माह पहले उन्होंने शासन को एक संस्तुति दी। इसमें उन्होंने कोडेवलपर के बारे में राय दी। इसके अलावा पीएसपी का कार्यकाल बढ़ाने को कहा। यही नहीं कोर्ट के विवाद और जमीन नहीं देने के मामले में जीरो पीरियड देने की संस्तुति मंत्री समूह ने मुख्यमंत्री को दी।
संस्तुति पर नहीं हुआ कोई निर्णय
सूत्रों का कहना है कि इस संस्तुति को कैबिनेट से वापस कर दिया गया और प्राधिकरण को खुद इस मामले में निर्णय लेने को कहा गया। यहां सवाल खड़ा होता है कि मंत्री समूह की संस्तुति और मुख्यमंत्री के दखल होने के बावजूद इस पर आपत्ति क्यों उठाई गई और वापस क्यों किया गया। हालांकि उद्योग मंत्री सतीश महाना इससे इंकार कर रहे हैं और उनका कहना है कि इसकी संस्तुतियों को भी संज्ञान में लिया जा रहा है।
नई कमेटी में केंद्र और राज्य के अधिकारी
प्रस्तावित की जा रही नई कमेटी में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा के अलावा प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव आवास, प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास, नोएडा-ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण के सीईओ सहित केंद्र सरकार के मंत्रालयों के दो अन्य अधिकारियों को भी बतौर सदस्य नामित करने की बात सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि नई कमेटी और इसके कार्यों के बाबत एक-दो दिन में लखनऊ से आदेश जारी होने वाला है। जानकारों का कहना है कि कमेटी को 15 दिन से एक माह के भीतर बिल्डर-खरीदार मामले पर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
पूरे स्टेट को लेकर एक नई कमेटी का गठन किया जा रहा है। बिल्डर-खरीदार मामला पूरे प्रदेश में चल रहा है। पिछले दिनों केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में एक बैठक हुई थी। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भी बैठक में हिस्सा लिया था।
भारत सरकार के स्तर पर भी निगरानी जरूरी समझी गई इसलिए प्रदेश के अलावा केंद्र के अधिकारी भी कमेटी में रहेंगे। इसमें नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अलावा राज्य के सभी हिस्सों में चल रहे बिल्डर-खरीदार मामलों का संज्ञान लिया जाएगा। यही नहीं पिछली संस्तुतियों को मूर्त रूप देने का काम होगा।
सतीश महाना, उद्योग मंत्री, यूपी