राम बाबू वर्मा हमेशा अपनी बेटी प्रिया के साथ खड़े रहे। चाहे उसने डॉक्टरी की पढ़ाई करनी चाही या अपनी जिंदगी आजादी से जीनी चाही।
55 साल के जयपुर के इस दर्जी ने अपनी कठिनाईयों को कभी अपनी बेटी के राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। लेकिन जब अपने जिंदगी के सबसे मुश्किल पलों में शनिवार को बेटी को अपने पिता की जरूरत थी, तो वह उसके साथ नहीं थे।
जब तक वह पहाड़गंज के होटल प्रेसीडेंसी पहुंचे जहां उनकी बेटी ने रुकी थी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वो अपनी नसें काटकर मर चुकी थी।
आत्महत्या से पहले पिता को किया था फोन
गौरतलब है कि आत्महत्या करने से पहले जिस इंसान को प्रिया वेदी ने आखिरी बार फोन किया था वो उसके पिता थे। फोन पर प्रिया ने उनसे कहा था कि वह कोई बड़ा कदम उठाने वाली है।
ये सुनते ही वो जयपुर से दिल्ली के लिए निकल गए थे। उनके होठों पर बस अपनी बेटी की सलामती की दुआ थी। लेकिन जब तक वह पहुंचे सब कुछ खत्म हो चुका था।
रविवार देर शाम राम बाबू को अपनी बेटी की लाश मिली। वो टूट चुके थे और दुख व पछतावे से भर गए थे क्योंकि उन्होंने ही बेटी की शादी तय की थी जिसने उसकी जिंदगी जहन्नुम बना दी।
'प्रिया मेरा गुरूर थी'
वर्मा ने बताया कि, 'मैं अपनी बेटी के लिए डॉक्टर लड़का ही चाहता था। इसलिए मैंने तीन डॉक्टरों को चुनने के बाद सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर कमल वेदी को चुना।'
वर्मा बताते हैं कि प्रिया उनका गुरूर थी। वह एक मेधावी छात्रा थी। वो कहते हैं कि, 'प्रिया हमेशा ही एक आत्मनिर्भर लड़की बनना चाहती थी।
जब उसने बताया कि वो डॉक्टर बनना चाहती है तो हमारे सभी रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। मेरे रिश्तेदार कहते थे कि लड़की को इतना क्यों पढ़ाना आखिर शादी ही तो करनी है।'
प्रिया की पढ़ाई हिंदी मीडियम में हुई थी
वर्मा अपने घर की स्थिति बताते हुए कहते हैं कि हालांकि उनके पास एक ही कमरा पढ़ने के लिए था लेकिन उनके तीनों ही बच्चे पढ़ाई में काफी अच्छे रहे हैं।
उनके बच्चों को कभी-कभी लाइब्रेरी में भी पढ़ना पढ़ता था। उनका सबसे बड़ा बेटा विजय भी डॉक्टर है जबकि छोटा बेटा बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर है।
वर्मा कहते हैं कि प्रिया की पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल में हुई थी। जब विजय और प्रिया ने उनसे डॉक्टर बनने की इच्छा जताई थी तो उन्होंने उन्हें पास के ही कोचिंग सेंटर में डाल दिया। उन्हें अफसोस था कि वो अपने बच्चों को कोटा नहीं भेज सके लेकिन बच्चों ने फिर भी अच्छा किया।
नहीं था बेटी कर लेगी सुसाइ़ड
विजय को पहले नौकरी मिल गई और उसने परिवार को आर्थिक रूप से मदद देनी शुरू कर दी। विजय ने ही प्रिया की शादी में भी पिता की सहायता की।
पिछले दो सालों से वर्मा परिवार को ये बात पता नहीं थी कि प्रिया का वैवाहिक जीवन सुखी नहीं है। उसने कभी कोई शिकायत नहीं की।
हालांकि बाद में प्रिया के पिता को पता चल गया था कि वो परेशानी में है लेकिन उन्होंने ये कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी खुद को खत्म कर लेगी। बाबू राम ने बेटी की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि, 'मेरे संघर्ष के दिन लौट आए हैं।'