उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि नई शिक्षा नीति में प्राइवेट शिक्षा बोर्ड बनाने की बात कही गई है, यह शिक्षा के लिए एक घातक कदम होगा। इस तरह से निजी स्कूलों को अलग शिक्षा बोर्ड बनाने की मंजूरी मिलने से शिक्षा का निजीकरण बढ़ जाएगा। इसे गंभीर कदम बताते हुए उनका कहना है कि शिक्षा देना सरकार का काम है और शिक्षा बोर्ड भी सरकारी होने चाहिए।
वहीं उन्होंने देश में जीडीपी का कम से कम 6 फीसदी बजट शिक्षा पर रखना अनिवार्य करने के लिए कानून बनाए जाने की बात कही है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को नई शिक्षा नीति पर केंद्रीय सलाहकार शिक्षा बोर्ड (कैब) की स्पेशल मीटिंग के बाद प्रेस कांफ्रेंस की। इसके साथ ही उन्होंने नई शिक्षा नीति पर अपनी बात रखने के लिए एक के बाद एक कई ट्वीट कर डाले।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कॉलेजों को अपनी डिग्री देने का अधिकार देने की बात कही गई है। इस कारण से फर्जी डिग्री का धंधा खुलेआम शुरू हो जाएगा। नई शिक्षा नीति में दिए गए कुछ प्रस्ताव को उन्होंने निजी शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने वाला बताया, जबकि नीति में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है कि देश के बच्चों की शिक्षा सरकार का काम है। वहीं नई शिक्षा नीति में कॉलेजों को जो अपनी डिग्री देने के अधिकार की बात कही जा रही है, इस पर उनका मानना है कि इससे फर्जी डिग्री का धंधा खुलेआम चलने लगेगा।
हालांकि उन्होंने उच्च शिक्षा पर शोध संस्थानों के विचार की सराहना की। उन्होंने परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव किए जाने को जरूरी बताया। केवल रटने की जगह सीखने की बात नई शिक्षा नीति में लिख देने या कहने से कुछ नहीं बदलेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी स्कूलों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता निजी स्कूलों के बराबर होनी चाहिए।
देश में सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल 5 फीसदी बच्चों की पहुंच ही गुणवत्ता की शिक्षा तक है, बाकी 95 फीसदी बच्चे औसत गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसे बदलने की जरूरत है।