दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनती देख तिहाड़ जेल के कैदियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कैदियों को लगने लगा है कि पैरोल देने में अब भेदभाव नहीं होगा।
तिहाड़ में पैरोल के लिए जेल अधीक्षक को आवेदन करना होता है। जो पुलिस और दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास भेजा जाता है। गृह विभाग के आदेश के बाद ही पैरोल मिलती है।
कैदियों का आरोप है कि राजनीति पहुंच रखने वाले लोगों को पैरोल में कोई दिक्कत नहीं होती, जबकि आम कैदियों की पैरवी न होने से उन्हें जेल में ही रहना पड़ता है।
सूत्रों की मानें तो चुनाव के दिन से लगातार कैदी टेलीविजन पर नजर रखे हुए हैं।
सरकार की अहम भूमिका
तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने कहा कि पैरोल के लिए आने वाले आवेदन सरकार को भेजे जाते हैं। यह सरकार पर निर्भर करता है कि संबंधित कैदी को पैरोल दी जाए या नहीं।
जेल के लगभग एक हजार कैदी पैरोल के हकदार हैं। पैरोल देने में सरकार की अहम भूमिका होती है। सरकार के इंकार के बाद फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाती है।
हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि हर साल चार-पांच सौ पैरोल के आवेदन आते हैं। उसमें से करीब सौ से अधिक कैदियों को पैरोल मिल जाती है।