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फर्जी मार्कशीट-डिप्लोमा देने पर प्रिंसिपल गिरफ्तार

Sat, 06 Sep 2014 01:40 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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राकेश मार्ग स्थित निजी पालीटेक्निक कालेज में छात्रों को इंजीनियरिंग का फर्जी डिप्लोमा और मार्कशीट देने का मामला प्रकाश में आया है। क्रास चेकिंग के दौरान फर्जीवाड़े का पता चलने पर छात्रों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया।
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आरोप है कि छात्रों को कालेज प्रबंधन ने करीब एक घंटे तक बंधक बनाए रखा। छात्रों की सूचना पर पुलिस को लेकर पहुंचे परिजनों ने 30 से अधिक छात्रों को मुक्त कराया।

27 छात्रों की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी कालेज प्रिंसिपल के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है और प्रिंसिपल समेत प्रबंधन से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से श्रीधर यूनिवर्सिटी राजस्थान की 15 मार्कशीट भी बरामद हुई हैं।
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सीओ द्वितीय कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि नेहरूनगर थर्ड में पालीटेक्निक और होटल मैनेजमेंट कोर्स कराने का कालेज है। अशोक नगर निवासी प्रधानाचार्य सुरजीत 2008 से कालेज चला रहे हैं।

आरोप है कि कालेज की ओर से पालीटेक्निक कर रहे करीब 80 छात्रों को हर सेमेस्टर की परीक्षा के बाद अलग- अलग यूनिवर्सिटी की मार्कशीट दी जा रही थी। मार्कशीट फर्जी लगने पर छात्रों ने संबंधित यूनिवर्सिटी में जा कर इसकी जांच कराई।

छात्रों का दावा है कि मार्कशीट फर्जी निकली। इसी पर छात्रों ने कालेज में हंगामा किया। आरोप है कि प्रिंसिपल ने उन्हें कालेज में ही बंधक बना लिया है। कालेज के मेनगेट पर ताला लगवा दिया।

परिजनों को फोन पर सूचना देने पर वे पुलिस को लेकर पहुंचे और उन्हें छुड़ाया गया। एसएचओ ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी कालेज प्रिंसिपल सुरजीत निवासी अमरोहा, नगेंद्र, सौरभ और मनोज निवासी बिहार हैं।

पुलिस पिछले दो सालों में कालेज द्वारा लगातार फर्जीवाड़े का मामला सामने आने पर पुलिस पिछले वर्षों में पास आउट हुए छात्रों की डिग्री की जांच कर रही है।

छात्रों ने बताया कि कालेज की तरफ से शुरुआत में अरुणाचल प्रदेश, एएलएम, शोभित और वर्तमान में श्रीधर यूनिवर्सिटी का नाम का लोगों लगी मार्कशीट दी जा रही हैं, जो की फर्जी हैं।

आरोप है कि कालेज का हर साल नाम बदला जाता है। वर्ष 2012 में नाम था गाजियाबाद पालीटेक्निक कालेज, वर्ष 2013 में एआईएचएम इंस्टीट्यूट ऑफ पालीटेक्निक नाम रखा गया था।

प्रथम, द्वितीय और थर्ड सेमेस्टर में अलग-अलग यूनिवर्सिटी की मार्कशीट मिलने की उन्हें पहले से भनक थी, विरोध करने पर कालेज प्रशासन उन्हें आश्वासन देता था।

अब तक बंटीं सैकड़ों फर्जी मार्कशीट/डिग्री
पुलिस ने बताया कि हर साल कालेज से सौ के आसपास बच्चे पास आउट होते हैं। 700 से अधिक छात्र विभिन्न कोर्सों में पासआउट हो चुके हैं। अधिकांश को कालेज की ओर से प्लेसमेंट भी दिया गया था।

सीओ ने बताया कि उन छात्रों की भी जांच की जाएगी। हो सकता है कि वे कहीं नौकरी भी कर रहे हों। कालेज के तमाम दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि ये लोग अखबारों में एड देकर फंसाते थे। कालेज में छपरौला, बलिया, मुरादाबाद, मध्यप्रदेश आदि के छात्र पढ़ रहे थे।

जांच को तैयार: कालेज प्रधानाचार्य
कालेज प्रिंसिपल ने बताया कि शुरुआत में कालेज से जुड़ी यूनिवर्सिटी के बंद होने पर छात्रों को दूसरी यूनिवर्सिटी की मार्कशीट दी गई थी। संबंधित यूनिवर्सिटी की ओर से कालेज को मान्यता मिली है। वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है।
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