सस्ती सीएनजी का फायदा आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। ऑटो से सफर करने वाले हजारों यात्री अब भी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं, क्योंकि सीएनजी दरों में भारी कमी के बावजूद ऑटो का किराया कम नहीं हुआ है।
लिहाजा यात्रियों की जेब पर बोझ बरकरार है और ऑटोवाले जमकर चांदी काट रहे हैं। ऑटो किराये पर सरकारी नियंत्रण न होने से जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है।
यह भी पढ़ें:अब इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगे ऑटो दौड़ेंगे सड़कों पर
सीएनजी के दाम बढ़ते ही ऑटोवाले मनमाने तरीके से किराया बढ़ा लेते हैं, लेकिन जब सीएनजी सस्ती हुई तो किराया कम करने से कन्नी काटी जा रही है। विभिन्न रूटों पर दौड़ रहे बड़े ऑटो का सफर सबसे महंगा साबित हो रहा है।
सीएनजी दरें घटने से पहले, दिनभर में 400 से 500 रुपये की सीएनजी का खर्च आता था, लेकिन अब यही खर्च घटकर लगभग आधा हो गया है। नतीजतन पुराने स्लैब पर ही यात्रियों को ऑटो से सफर करना पड़ रहा है।
यात्रियों को दो किलोमीटर के लिए 7 और चार किमी के लिए 10 रुपये का देने पड़ते हैं। किराये को लेकर हर रोज यात्रियों और ऑटो चालकों के बीच नोंकझोंक हो रही है, लेकिन प्रशासन और परिवहन विभाग चुप्पी साधे हुए है।
परिवहन विभाग की उदासीनता
परिवहन विभाग की उदासीनता आम जनता के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ऑटो किराए का मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक इसका कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है। नोएडा में ऑटोवाले अपनी मर्जी से ही किराया तय करते हैं। यहां कोई सरकारी किराया निर्धारित नहीं है।
रोड टैक्स का बहाना
नोएडा की सड़कों पर ऑटो संचालन का खर्च ज्यादा होने की दलील ऑटोवालों की ओर से दी जाती है। ऑटोवालों के मुताबिक दिल्ली में सालाना रोड टैक्स 305 रुपये वसूला जाता है, जबकि नोएडा में 1800 रुपये टैक्स देना पड़ता है, जो कि बहुत ज्यादा है।