मोदीनगर विधायक सुदेश शर्मा का विधानसभा में उठाया गया सवाल सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है। मंडल के ज्यादातर शहरों में लगने वाले जाम और इसके समाधान को प्रयास न होने को उन्होंने सदन में उठाया था।
विधायक ने परिवहन माफिया के मकड़जाल और और अधिकारियों की लापरवाही को जाम का मुख्य कारण बताया। जाम समाप्त कराने के लिए कोई भी उपाय न किए जाने और न ही सुझावों को स्वीकार करने के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। बसपा विधायक बहाव चौधरी ने भी दिनरात लगने वाले जाम पर नाराजगी प्रकट की।
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चुनावी सीजन में जनहित से जुड़े इन आरोपों से सरकार परेशान है। यही कारण रहा कि प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक परिवहन संचालन ने मोदीनगर आकर विधायक से मुलाकात की। मंडल के ज्यादातर शहरों के प्रमुख मार्ग जाम की चपेट में हैं। यहां से होकर निकलने वाले तीनों एनएच- 91, 58 और 24 पर जाम लगा रहता है।
दरअसल रोडवेज और निजी संचालन वाली परमिट बसों का संचालन अस्तव्यस्त है। पर्याप्त साधन न होने से सफर का सहारा डग्गामार वाहन बनते हैं। ये किसी भी चौराहे-सड़क किनारे खड़े होकर सवारियों को उतारना-बैठाना शुरू कर देते हैं, इससे जाम लग जाता है। बसपा विधायक बहाव चौधरी ने भी इस प्रकरण को अपना समर्थन दिया है।
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इसको मोदीनगर विधायक सुदेश शर्मा ने विधानसभा में उठाया। उन्होंने अस्त-व्यस्त बस संचालन, जर्जर रोडवेज डिपो, लापरवाह अफसरों और डग्गामार संचालन को आधार बनाया। साक्ष्यों सहित प्रमुखता से उठाए गए इस जनहित के मामले से परेशान सरकार इसको जल्द सुलझाना चाहती है।
मुख्य महाप्रबंधक प्रशासन परिवहन राजेंद्र कुमार सिंह ने मोदीनगर आकर जाम, यातायात संचालन, रोडवेज डिपो और रोडवेज बसों के संचालन का जायजा लिया। उन्होंने सुदेश शर्मा से मुलाकात कर उनको भी संतुष्ट करने की कोशिश की। जाम पर नियंत्रण और सुचारु बस संचालन पर प्रभावी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।