सेक्टर-33 स्थित रामलीला मैदान से जब भगवान का रथ शोभायात्रा के रूप में इस्कॉन मंदिर चला तो लोग भक्ति से सराबोर हो गए। पंडाल से लेकर मंदिर तक पूरे रास्ते में भक्तों ने रंगों व फूलों की रंगोली बना रखी थी।
पंडाल से भगवान का रथ चलते ही लोग हरे रामा, हरे कृष्णा की धुन पर नाचने लगे। शोभायात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से सिंगापुर के फूलों की वर्षा भी कराई गई। हेलीकॉप्टर ने मुख्य पंडाल से मंदिर तक दो चक्कर लगाए।
शोभायात्रा में देश-विदेश से आए भक्त शामिल हुए। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंदिर पहुंचने पर माहौल और भी ज्यादा भक्तिमय हो गया। इस्कॉन के वरिष्ठ सदस्यों को पहले मंदिर में लाया गया।
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इसके बाद भगवान को सिर पर उठाकर धूमधाम से मंदिर में प्रवेश कराया गया। हजारों श्रद्धालु इस पल के साक्षी बने। प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान का महाभिषेक किया गया। बृहस्पतिवार को मंदिर का उद्घाटन होगा।
यज्ञ के बाद हुई प्राण प्रतिष्ठा
सुबह छह बजे मंगला आरती से पूजा-अर्चना की शुरूआत हुई। इसके बाद मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा समारोह शुरू हुआ। यज्ञ के माध्यम से श्री श्री राधा गोविंद देव, श्री श्री जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा व श्री श्री गौर निताई का आह्वान किया गया।
इस्कॉन के आचार्य लोकनाथ स्वामी महाराज ने बताया कि श्रीविग्रहों की स्थापना एक वैज्ञानिक विधि है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रीविग्रह भगवान भक्तों से भावों का आदान-प्रदान करते हैं।