आम लोगों के खून पसीने की कमाई से लिए गए टैक्स और टिकट की रकम से लगने वाले सूरजकुंड मेले में वीवीआईपी (खासतौर पर नेताओं और नौकरशाहों) के लिए अलग चौपाल सजी।
बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला, राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा एवं विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा के लिए होटल राजहंस में चौपाल सजाई गई। यह होटल मेला परिसर के पास ही मौजूद है लेकिन इसमें आम नागरिकों के प्रवेश पर पाबंदी है।
इन विशिष्ट लोगों को जिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मजा लेना था उसका पूरा ग्रुप इस होटल की पूल साइड पर प्रस्तुति देने पहुंचा। इनके साथ कई बड़े नौकरशाह भी थे। जिनके लिए मेले में आई विदेशी कलाकारों को वहां नचाया गया।
दूसरी ओर मेले की मुख्य चौपाल पर स्कूली बच्चों एवं देसी कलाकारों से काम चला। राष्ट्रीय राजधानी या फिर प्रदेश की राजधानी से आए विशिष्ट लोगों के लिए आए दिन चौपाल पर प्रस्तुति देने वाले कलाकार अधिकारियों के कहने पर अपना साज-बाज लेकर राजहंस पहुंचते हैं।
कलाकारों को बुरा लगता है लेकिन....
वहां चंद विशिष्ट लोगों के सामने नृत्य-संगीत की प्रस्तुति दी जाती है। कई कलाकार अंदरखाने इसे बुरा मानते हैं, लेकिन रोजीरोटी के चक्कर में मुंह नहीं खोलते।
कई लोग इस विशेष व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। क्योंकि जो भी पर्यटक यहां आता है वह 70 रुपये की टिकट और लगभग 50 रुपये तक की पार्किंग देता है। ऐसे में उसके दाम पर आने वाले कलाकारों का मेले से अलग कार्यक्रम क्यों?
रंगकर्मी भी हैं चिंतित
रंगकर्मी ज्योतिसंग का कहना है कि नेताओं को इस तरह की संस्कृति छोडऩी चाहिए। राजाओं वाला रवैया नहीं अपनाना चाहिए। सभी जनता के प्रतिनिधि हैं इसलिए जनता के बीच चौपाल पर बैठकर नाच-गाना देखें।
एक कल्चरल ग्रूप के सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मेले में चौपाल सहित आधा दर्जन से अधिक जगहों पर नृत्य-संगीत चल रहे हैं तो फिर चंद लोगों के लिए होटल में प्रस्तुति ठीक नहीं। इससे कलाकारों का दिल टूटता है।