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पुस्तकों के महाकुंभ का हुआ आगाज, जावड़ेकर ने किया उद्घाटन, काफी संख्या में पहुंचे पाठक

Sun, 06 Jan 2019 05:24 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मेले से किताब खरीद कर आती युवतियां - फोटो : अमर उजाला
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पुस्तक प्रेमियों के लिए प्रगति मैदान में शनिवार से पुस्तकों के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का आगाज हो गया। सप्ताहांत होने के कारण शनिवार को काफी संख्या में पाठक अपनी पसंदीदा पुस्तकें खरीदने मेले में पहुंचे। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मेले का उद्घाटन किया और लोगों से उनकी कमाई का 25 फीसदी हिस्सा कला और संस्कृति पर खर्च करने का आग्रह किया। इस बार मेले की थीम दिव्यांगजनों की पठन आवश्यकताएं रखी गई हैं।      

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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने लोगों से कहा कि किताबों में एक खुशबू होती है। टीवी और अखबार प्रचलन के बावजूद पढ़ने की चाहत समाप्त नहीं हुई है। किताबों से न केवल विचार मिलते हैं बल्कि इससे जीवन भी समृद्ध होता है। समृद्धि केवल पैसे से नहीं आती बल्कि किताबों से भी आती है। देश में पढ़ने की संस्कृति से विचारों का भी आदान प्रदान बढ़ेगा।

27वें विश्व पुस्तक मेले में 20 से अधिक देश भाग ले रहे हैं और 650 प्रकाशकों के 1350 स्टाल लगाए गए हैं। मेले के उद्घाटन के बाद जावडे़कर ने पुस्तक स्टॉल्स का जायजा लिया। उन्होंने शारजाह के शाह सुल्तान बिन मुहम्मद अल कासिमी की पुस्तक ‘बीबी फातिमा और बादशाह के बेटे’ के हिंदी तथा अंग्रेजी पुस्तकों के संस्करण का लोकार्पण किया तथा ब्रेल लिपि में 250 किताबों की सूची का कैटलॉग तथा कैलेंडर भी जारी किया। उन्होंने मेले के मुख्य अतिथि शारजाह के राजकीय विभाग के कार्यकारी अध्यक्ष शेख फहीम बिन सुलतान अल कासिमी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक एग्जाम वॉरियर की प्रति भेंट की।      
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राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि न्यास अब लोक भाषाओं में भी पुस्तकें प्रकाशित कर रहा है और उसने मगही, भोजपुरी तथा गोंड भाषा एवं त्रिपुरा की जनजातीय भाषाओं में भी किताबें प्रकाशित की हैं। इस मौके पर एनबीटी की निदेशक रीता चौधरी, शारजाह पुस्तक प्राधिकरण के अध्यक्ष अहमद बिन रक्कड़ अल अमेरी, शारजाह के लेखक हबीब योसेफ अब्दुल्लाह अल सईद तथा अखिल भारतीय दृष्टिहीन महासंघ के महासचिव जेएल कोल एवं उच्च शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम भी मौजूद थे।      

- एक औरत की डायरी से... पुस्तक का लोकार्पण      
पुस्तक मेले के पहले दिन एपीएन प्रकाशन द्वारा लेखिका उमा झुनझुनवाला की पुस्तक एक औरत की डायरी से और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संपादक लालित्य ललित की पुस्तक पांडेय ली और दिल्लगी का लोकार्पण किया गया। लोकसभा सचिवालय संपादक रणविजय राव एवं एपीएन पब्लिकेशंस के निदेशक निर्भय कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे। प्रसिद्ध साहित्यकार ममता कालिया ने एक औरत की डायरी से पुस्तक के बारे में अपनी राय दी।

- साहित्य अकादमी की 50 पुस्तकों का विमोचन      
हॉल नंबर 12 में ऑथर्स कॉर्नर में साहित्य अकादमी की 50 पुस्तकों का विमोचन केंद्रीय हिंदी संस्था आगरा के उपाध्यक्ष कमल किशोर गोयनका ने किया। प्रख्यात लेखिका मृदुला गर्ग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। ये सभी पुस्तकें 25 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित हैं। कमल किशोर ने कहा कि अकादमी की पुस्तकें साहित्य संसार का गौरव बढ़ाती हैं। वहीं, नारी चेतना मंच पर मृदुला गर्ग, जे भाग्य लक्ष्मी, उर्दू लेखिका तरन्नुम रियाज और अंग्रेजी लेखिका सुक्रता पॉल कुमार ने विचार रखे व रचनाएं प्रस्तुत कीं।      

- दिव्यांगजनों में दिखी खुशी      
पहले ही दिन दिव्यांग पाठकों की संख्या भी काफी दिखाई दी। दिल्ली के दिव्यांग पाठक अंकित ने बताया कि उन्हें खुशी है कि दिव्यांगों के बारे में इस तरह का प्रयास किया गया। दिव्यांगजनों को पुस्तक मेले में प्राथमिकता देकर उनके मनोबल को बढ़ाया गया है। उन्होंने पुस्तक मेले से पहले ही दिन अपनी पसंदीदा पुस्तकें खरीदीं।      

- इन पुस्तकों का लोकार्पण      
प्रभात प्रकाशन के तत्वावधान लेखक शशिकांत सदैव की पुस्तक व्रत-उपवास के धार्मिक और वैज्ञानिक आधार एवं गुरु का महत्व का लोकार्पण किया गया। इन पुस्तकों का विमोचन व्यंगकार एवं संपादक डॉ हरीश नवल ने किया। प्रभात प्रकाशन के स्टाल पर विभिन्न दिव्यांग विभूतियों अरुणिमा सिन्हा, राजेश सिंह, हेलर केलर, नवीन गुलिया, भावेश भाटिया, लुई ब्रेल और स्टीफन हॉकिंस द्वारा लिखित लगभग 15 पुस्तकें मौजूद हैं।       

- दिल्ली कमेटी की धार्मिक पुस्तकें       
प्रगति मैदान में किताबों के महाकुंभ विश्व पुस्तक मेले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बुक स्टाल का उद्घाटन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने किया।  उन्होंने कहा कि इस मेले में सिख धर्म, इतिहास एवं साहित्य को उत्साहित करने के लिए अवसर मिलेंगे एवं उनका अनुवाद संसार की अन्य भाषाओं जैसे फ्रैंच, जर्मनी, इटालियन आदि में करने की प्रेरणा मिलेगी। 

- दिव्यांगों के लिए फिल्मों का प्रदर्शन      
पुस्तक मेले के थीम पवेलियन दिव्यांगजनों की पठन आवश्यकताएं में दिव्यांगों पर आधारित लघु फिल्मों को दिखाया गया। इन फिल्मों में दिव्यांगजनों के जीवन संघर्ष और समाज में बेहतर प्रभावी छाप छोड़ने की कहानियों के बारे में दिखाया गया। 

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