अमर उजाला कॉन्क्लेव में पहुंचे एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
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'छुट्टियां एक बीमारी है। गर्मियों में तीन महीने की छुट्टियों की बजाय छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण देना चाहिए। इसकी शुरुआत हम एआईसीटीई के कॉलेजों से करने जा रहे हैं। ताकि छात्रों की कमियों को सुधारते हुए उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मुहैया करवाने के साथ उन्हें अच्छा इंसान भी बनाया जा सके। '
यह बातें मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बृहस्पतिवार को होटल कैलारिजस में अमर उजाला अखबार, उसकी वेबसाइट अमर उजाला डॉट कॉम व अमर उजाला टीवी के तत्वावधान में आयोजित अमर उजाला एचआर एंड डिजिटल कॉन्क्लेव की अध्यक्षता करते हुए कही।
जावडेकर ने शिक्षण संस्थान प्रबंधन और छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अब छात्र बेहद जागरूक हो गए हैं। डिजिटल युग में तकनीक का प्रयोग करते हुए पिछले दिनों छात्रों ने देशभर से चार सौ इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों को बंद करवा दिया। छात्रों ने वेबसाइट पर पुराने छात्रों को तलाशा, उनसे जानकारी लेने के बाद प्लेसमेंट जांच और दाखिला लेने से इंकार कर दिया। इन शिक्षण संस्थानों को ताला इसलिए लगा, क्योंकि छात्रों ने दाखिला लिया ही नहीं।
(पढ़िए : केंद्रीय संचार व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इस मौके पर क्या कहा)
(देखिए इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो)
60 फीसदी इंजीनियरों के पास डिग्री है, नौकरी नहीं
अमर उजाला कॉन्क्लेव
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जावड़ेकर ने कहा कि आज 60 फीसदी इंजीनियरों के पास डिग्री के बाद भी नौकरी नहीं है तो एमबीए पास गलियों में घूम रहे हैं या फिर दस-पंद्रह हजार की नौकरी कर जिंदगी बसर कर रहे हैं। इन सब पर मंथन की जरूरत है। इसलिए अब हर वर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों को हर कोर्स का पाठ्यक्रम बदलना होगा। वेबसाइट पर मॉडल पाठ्यक्रम अपलोड किया जाएगा, जिसे अभिभावक व छात्र अपनी पसंद से मार्केट की मांग के आधार पर चुनेंगे।
इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय संचार व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और जीएल यूनिवर्सिटी के सोसायटी सेक्रेटरी नीरज अग्रवाल ने किया। रेल राज्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में भी जारी भेड़चाल के चलते न अच्छे इंजीनियर बन रहे हैं और न अच्छे डॉक्टर।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों पर अपनी मर्जी न थोपें और वे जो बनना चाहते हैं उन्हें बनने दें। सरकार भारतीय शिक्षा पद्धति का पुराना इतिहास लौटाने में जुटी है, इसकी शुरुआत हो चुकी है। आने वाले समय में शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कॉन्क्लेव में क्या रहा खास?
कॉन्क्लेव के पहले सत्र में दोपहर तीन बजे से इंटरनेट के व्यापक प्रसार और नौकरियों पर उसके प्रभाव की चर्चा हुई जबकि देर शाम से दूसरे सत्र में बेसिक स्किल्स को कॉलेज एजुकेशन के साथ जोडने के मसले पर विचार होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने की।
इस अवसर पर सिंहा ने नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन काल में हमारी शिक्षा पद्धति दूसरे देशों के लिए उदाहरण थी। अब हम अपनी भारतीय शिक्षा पद्धति में सुधार करते हुए एक नए भारत का निर्माण करेंगे। दसवीं बोर्ड परीक्षा का निर्णय हो चुका है। धीरे-धीरे इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इससे धीरे-धीरे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि डिग्री लेकर छात्रों को अपने बजाए देश के लिए काम करना चाहिए। देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलने वाले छात्रों में से महज चालीस फीसदी को ही प्लेसमेंट मिल पाता है, इसका बड़ा कारण पढ़ाई की गुणवत्ता में गिरावट व मौजूदा पाठ्यक्रम है।
अच्छा है तो टिकेगा, बुरा होगा तो जाएगा
जावडेकर ने उत्तर प्रदेश में आम आदमी के बहुमत के फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े-बड़े विशेषज्ञों के अंदाजों को नतीजों ने झूठला दिया है। आम आदमी आज अच्छी शिक्षा, रोजगार चाहता है। इसलिए जाति-मजहब को भूलाते हुए बहुमत से जीत दिलवाई।
उन्होंने कहा कि आम लोगों के घरों में काम करने वाली कामवाली और ड्राइवर भी अपने मालिक से एक ही मांग रखता है कि आपकी पहचान हो तो मेरे बच्चे को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवा दें। क्योंकि वे भी अपने बच्चे को ईमानदारी के साथ तरक्की की राह पर आगे बढ़ता देखना चाहते हैं। यही हिंदोस्तान की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए हम सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा का नारा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
जावडेकर ने छात्रों से किया अच्छा इंसान बनने का आह्वान
जावडेकर ने छात्रों से अच्छा इंसान बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ बनने से पहले अच्छा इंसान बनने की दरकार है। इसलिए किताबी ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों को न भूलें। शिक्षण संस्थान भी किताबी ज्ञान के साथ छात्रों के मन में मानवीय मूल्यों को तैयार करने में मदद करें। क्योंकि आज नौकरी के मौके पर व्यवहार, स्वभाव व काम करने के तरीके की भी जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि महंगी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा मिलेगी, यह नारा अब पुराना हो जाएगा। बल्कि अच्छी शिक्षा ही बेहतर शिक्षा है, आम लोगों को समझ आएगा। स्कूल, उच्च शिक्षण संस्थान से लेकर शिक्षकों को अपने पढ़ाने के ढंग में बदलाव करना होगा। बेहतर नतीजा न देने पर गेट पर ताला तो शिक्षक बाहर हो जाएंगे। हालांकि सबको सुधरने का मौका देंगे, लेकिन गुणवत्ता से अब कोई समझौता नहीं होगा।
कॉन्क्लेव में इन लोगों ने की शिरकत
कॉन्क्लेव में देश भर के प्रमुख कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के प्रतिनिधियों के साथ भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की। एचसीएल के सोमेन चटर्जी, ओएलएक्स ज्योता चटर्जी, पॉलिसीबाजारडॉटकॉम के पुनीत खुराना, डीएस ग्रुप की सीमिन असकरी, जीमोबी अमित डे, विष्णु इंजीनियरिंग विजय शाह, मोबीलोटी के जगदीश हर्ष आदि विशेषज्ञों ने इंटरनेट, पहली नौकरी, बेसिक स्किल्स, कॉलेज एजूकेशन आदि पर छात्रों व उपस्थित लोगों की शंकाओं का समाधान किया। यहां पर तकनीक के अच्छे व बुरे पहलुओं पर विस्तुत चर्चा भी हुई। इस अवसर पर छात्रों व अन्य उपस्थित लोगों ने विशेषज्ञों से सवाल जवाब भी किए।
विष्णु इंजीनियरिंग की तरफ से एक रोबोट प्रस्तुत किया। गंगनम स्टाइल गाने पर इसने ऐसा डांस प्रस्तुत किया की वहां मौजूद हर व्यक्ति झूम उठा। इसके अलावा उसके चलने व बोलने की दक्षता भी दर्शायी गई। बिट्स प्लानी ने भी अपने चलने व कई काम करने वाले रोबोट का प्रदर्शन किया। इसके अलावा गैजेट्स व अन्य इलेक्ट्रेनिक्स उपकरणों के माध्यम से लोगों को टेक्नॉलोजी के विस्तार से अवगत कराया गया।