फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व स्वास्थ्य दिवस विशेष: देश में बढ़ रही मानसिक रोगियों की संख्या

Fri, 07 Apr 2017 11:32 AM IST
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : demo pic
विज्ञापन
यदि आप किसी शारीरिक बीमारी से परेशान हैं तो हो संभव है कि आप मानसिक रोग से पीड़ित हों। देश-विदेश में हुए अलग-अलग अध्ययनों में यह सामने आया है कि शारीरिक बीमारी से पीड़ित करीब एक तिहाई मरीज मानसिक रोग से भी पीड़ित है लेकिन ऐसे मरीजों की पहचान नहीं हो पाती।
विज्ञापन


लिहाजा वे बिना इलाज के रह जाते हैं। यही कारण है कि देश की एक बड़ी आबादी किसी न किसी तरह के मानसिक रोग से पीड़ित है और ऐसे मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि भी हो रही है।

मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और इसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आती जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित व्यक्ति कई दूसरी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।
विज्ञापन


हृदय संबंधी बीमारी और रिमोट्यॉड ऑर्थराइटिस के मरीजों के लिए मानसिक रोग और भी घातक होता है। मानसिक रूप से बीमार  लोग इन्फर्टिलिटी से भी पीड़ित होते हैं।
विज्ञापन

ड‌िप्रेशन से मह‌िलाओं की गर्भधारण की क्षमता बाध‌ित होती है

depression
इंदिरा आईवीएफ अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद वेद ने बताया कि जब कोई महिला अवसाद या अत्यधिक तनाव के दौर से गुजरती है तो उसकी सामान्य गर्भधारण की क्षमता बाधित हो सकती है। यही स्थिति पुरुषों में भी देखी गई है, अत्यधिक तनाव की वजह से पुरुष में स्पर्म काउंट कम हो जाता है।

दिल्ली सरकार के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास) के निदेशक डॉ. निमेश देसाई ने बताया कि अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित 30 से 40 फीसदी मरीज मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित होते है।

डॉ. देसाई का कहना है कि ऐसे मरीजों में अवसाद होने का पता चिकित्सक भी नहीं लगा पाते हैं, क्योंकि देश में प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी है।  डॉ. देसाई का कहना है बीमारी की पहचान के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकों की फौज तैयार करनी होगी तभी इस पर काबू पाया जा सकेगा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें