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ई-रिक्शा मामले पर गरमाई सियासत

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दिल्ली हाईकोर्ट से ई-रिक्शा पर रोक लगाने का आदेश आने के बाद दिल्ली की राजनीति में अचानक एक भूचाल आ गया है। सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से मुलाकात करके ई-रिक्शा के लिए अध्यादेश लाने की मांग की।

एलजी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि ई-रिक्शा के बैन होने से दो लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

'भाजपा रच रही है बड़ी साजिश'

कांग्रेसी नेताओं ने उपराज्यपाल से कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बिना सोचे-समझे या कानूनी बारीकी देखे 650 वाट तक के ई-रिक्शा को मोटर वाहन अधिनियम से बाहर रखने की घोषणा की। इसके बाद 42 हजार ई-रिक्शा सड़क पर बढ़ गए।

अरविंदर सिंह ने कहा है कि भाजपा सांसद का राज्यसभा में बयान और कोर्ट में रखे गए पक्ष से साफ हो गया है कि भाजपा पूर्वांचल के लोगों को दिल्ली से खदेड़ने की साजिश रच रही है।

उनका कहना है कि प्रतिबंध के लिए अरविंद केजरीवाल भी जिम्मेदार हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा, ‘अगर ई-रिक्शा चालकों को राहत नहीं दी गई तो पार्टी नितिन गडकरी का घेराव करेगी।’
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भाजपा नेता भी पहुंचे एलजी के दरबार

भाजपा नेताओं ने शुक्रवार को उपराज्यपाल से मिलकर ई-रिक्शा के संचालन को जारी रखने का आग्रह किया। नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार को ई-रिक्शा सेवा नियमित करने के लिए कानूनी प्रणाली बनाने की दिशा में तीन माह का समय दिया जाए।

इसके अलावा दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 28 के अधीन ई-रिक्शा को चलाने की अनुमति दी जाए। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, विधायक प्रो. जगदीश मुखी, साहब सिंह चौहान, मोहन सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।

भाजपा नेताओं ने बताया कि उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि ई-रिक्शा का संचालन बंद नहीं किया जाएगा और उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से दिल्ली सरकार का पक्ष रखा जाएगा।
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