दिल्ली पुलिस के अजब-गजम कारनामे हैं। पुलिस आयुक्त कार्यालय में आए एक प्रशंसा पत्र को शिकायती पत्र बना कर कार्रवाई की अनुशंसा कर दी गई। आधे दर्जन अफसरों के हस्ताक्षर होते हुए पत्र जब थाने तक पहुंचा, तब खुलासा हुआ कि पत्र भेजने वाले ने शिकायत नहीं पुलिस की प्रशंसा की है।
नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार सचिन सिंह चौहान नामक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी को 19 अप्रैल, 2014 को ई-मेल से प्रशंसा पत्र भेजा। जिसमें कहा कि बहुत पहले वह मादीपुर पुलिस स्टेशन गया था। जहां, पुलिसकर्मियों का व्यवहार बहुत ही खराब था और एक सिपाही से बात करना संभव नहीं था।
उसके मन में पुलिस को लेकर यह सोच थी कि पैसे के बिना कोई काम नहीं करवाया जा सकता। लेकिन कुछ दिन पहले चाणक्यपुरी थाने में जब वह एक शिकायत लेकर पहुंचा तो बिना एफआईआर दर्ज किए ही उसकी समस्या का समाधान कर दिया।
पुलिस आयुक्त कार्यालय ने इस प्रशंसा पत्र पर एक कवरिंग लेटर लगाया जिस पर लिखा कि ई-मेल के जरिए मिली शिकायत। इस पत्र को डीसीपी विजिलेंस को भेज दिया गया। यहां से संयुक्त पुलिस आयुक्त (नई दिल्ली रेंज), फिर नई दिल्ली जिले के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, एसीपी चाणक्यपुरी आदि को भेजा गया। सभी पुलिस अधिकारी उचित कार्रवाई के आदेश देते हुए पत्र पर हस्ताक्षर कर आगे बढ़ाते गए। किसी भी अधिकारी ने यह नहीं देखा कि शिकायत क्या है और कार्रवाई क्या होनी चाहिए।
24 मई को यह पत्र जब चाणक्यपुरी थाने पहुंचा तो तब खुलासा हुआ कि जिस पत्र पर उचित कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं वह शिकायत नहीं बल्कि उनकी प्रशंसा में लिखा गया पत्र है। अब चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने पुलिस आयुक्त कार्यालय को लिखा है कि जिस पत्र पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं वह प्रशंसा पत्र है।