अभिषेक तिवारी और उसकी टीम ने प्रेमचंद को लोन का फार्म देने के लिए जीवीआर कंपनी के कर्मचारी प्रिंस को भेजा था। यही प्रिंस एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के कागजात भी प्रेमचंद को देने गया था। पुलिस ने प्रिंस को पकड़ा तो उसने बताया कि नितिन गौड़ ने उसे लोन के कागजात देने भेजा था।
पुलिस ने उसे गवाह बना कर नितिन गौड़ को हिरासत में लिया। नितिन ने बताया कि जीवीआर कंपनी से उपभोक्ताओं का डेटा चुरा कर सस्ता लोन दिलाने के नाम पर ठगी करता है। इसमें उसका साथ संजीव अरोड़ा, अमित और राहुल देते थे। नितिन ने ही फर्जी आईडी पर सिम कार्ड खरीद कर साथियों को बांटे थे जो बैंक के अधिकारी बन उपभोक्ताओं से बात कर उन्हें फंसाते थे।
फर्जी खाते में जमा करवाते थे धन
डीसीपी क्राइम लोकेंद्र सिंह ने बताया कि नितिन गौड़ उपभोक्ताओं से पंजाब एंड सिंध में फर्जी ढंग से खोले गए खाते में धन जमा करवाते थे। यह खाता एटूजेड सॉल्यूशन के नाम से खोला गया है। इस खाते में 53.50 लाख रुपये जमा हैं। खाते में रकम जमा करवाने वालों की डिटेल निकाली जा रही है, इससे पता चलेगा कि नितिन और उसके साथियों ने कितने और लोगों को ठगा है। इन लोगों ने फर्जी आईडी के जरिए सिम कहां से लिए, इसकी भी जांच की जा रही है।