सर्फाबाद से देहरादून की जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने के सफर में डीपी यादव का कई बार बचाव किया गया। नीतीश कटारा हत्याकांड में तत्कालीन राज्यसभा सांसद व अपराधी डीपी यादव और उसके बेटे विकास यादव को बचाने के लिए एक पूर्व प्रधानमंत्री ने गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी प्रशांत कुमार को फोन पर धमकी दी थी। हालांकि, आईपीएस अधिकारी ने किसी की भी नहीं सुनी और त्वरित कार्रवाई करते हुए विकास यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
यह खुलासा रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय ने किया है। विभूति नारायण राय ने ‘किस्सा लोकतंत्र’ नामक एक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें उन्होंने डीपी यादव की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कैसे राजनीति का अपराधीकरण किया जाता है। विभूति नारायण राय ने बताया कि 1982 से 1985 तक वह गाजियाबाद के एसएसपी रहे। उन्होंने ही सबसे पहले डीपी यादव के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। डीपी यादव ने सर्फाबाद गांव से गाजियाबाद के राजनगर में शिफ्ट किया था। शराब के अवैध धंधे और कई मर्डर केस उसके खिलाफ दर्ज हो चुके थे।
उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी था और उसे कानपुर से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि नीतीश कटारा हत्याकांड के बाद डीपी यादव के रुतबे पर चोट पड़ने लगी तो एक पूर्व प्रधानमंत्री ने गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी प्रशांत कुमार को मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए बोला और तल्ख लहजे में बात करते हुए धमकी भी दी। डीपी उस समय राज्यसभा सांसद था और उस पर इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा था। विभूति नारायण बताते हैं कि कई बार उन पर भी दबाव डाला गया, मगर उन्होंने किसी की नहीं सुनी।