फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुरुग्राम में किराए पर मकान चढ़ाना और पीजी चलाना ही सबसे बड़ा रोजगार

Mon, 18 Apr 2016 09:14 AM IST
मयंक तिवारी/अमर उजाला, गुड़गांव

सार

  • 60 हजार आबादी वाले गांव में 25 फीसदी ही मूल बाशिंदे 
  • जिस गांव के नाम पर पड़ा जिले का नाम उसका नहीं हुआ विकास
  • किराए पर मकान चढ़ाना और पीजी चलाना ही सबसे बड़ा रोजगार
  • 60 हजार आबादी वाले गांव में 25 फीसदी ही मूल बाशिंदे 
विज्ञापन
गुरूग्राम
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जो गांव जिले की पहचान बना आज उस गांव वालों की नजर में यहां कोई विकास नहीं हुआ। गुरु द्रोण की धरती कहे जाने वाले गुडग़ांव गांव की आबादी चार गुना बढ़ गई है। मगर यहां मूल बाशिंदों की संख्या महज 25 फीसदी रह गई है।
विज्ञापन


लोग यहां से निकल कर सेक्टरों और पॉश एरिया में बस गए हैं। जो लोग यहां रह गए हैं उनके पास किराये पर मकान और पीजी चढ़ाने के अलावा रोजगार को कोई और साधन नहीं है। गांव में सड़क तो दिखाई देती है मगर सीवर की हालत काफी खस्ता है। बारिश के दिनों में पानी भर जाता है।

गुडग़ांव गांव के युवाओं को कहना है कि उनके लिए कोई रोजगार नहीं है। जो बाप-दादा ने जो मकान बनवा रखा है वही उनकी जीविका का सबसे बड़ा साधन है। लोगों की जमीनें बिक चुकी हैं। काम नहीं होने कारण यहां काफी लोग ऐसे हैं जो विभिन्न स्थानों पर ताश खेलते नजर आते हैं। अमर उजाला ने रविवार को गुडग़ांव गांव का जायजा लिया। पता चला कि लोग काफी दिक्कत में हैं।  
विज्ञापन


गुडग़ांव-गांव का मौजी वाला कुंआ मार्ग...
गुडग़ांव गांव में सबसे मशहूर जगह मौजीवाला कुंआ है। की सड़क के दोनों ओर भवन बने हुए हैं। गांव के लोग कहते हैं कि यहां तो विकास हुआ ही नहीं। गुडग़ांव गांव का भी पहले नाम गुरुग्राम था। बाद में इसका नाम बदल कर गुडग़ांव गांव हुआ। अब जिले का नाम गुरुग्राम होने से कोई उत्साह नहीं है। लोगों ने कहा कि इससे गांव को कोई लाभ नहीं होने वाला है।

महावीर पुरा वार्ड एक...
ओल्ड दिल्ली रोड से गुडग़ांव गांव के महावीरपुरा में आता है। यहां जवान से लेकर बजुर्ग तक ताश खेलते नजर आए। गुडग़ांव से गुरुग्राम बनने पर उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं है। यहां किसी गुडग़ांव चाहिए तो किसी को गुरुग्राम। इस मुद्दे पर लोग बहस करते नजर आएं। उनका कहना है कि युवाओं को रोजगार से मतलब है चाहे यह गुडग़ांव में मिले या गुरुग्राम में। 80 साल के बुजुर्ग सुरेश कुमार कहते हैं कि किराये पर मकान न होता तो लोग खाने के लिए भी तरसते रहते।  

शीतला माता मंदिर की गली...
शीतला माता मंदिर इसी गांव की जमीन पर है। जिसका अपना इतिहास है। यहां गांव के कुछ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। लोग यहां प्रसाद बेचने से लेकर अन्य प्रकार के काम करते हैं। गांव वालों को माता मंदिर में भक्तों के आने का इंतजार रहता है। 
विज्ञापन


इसे भी जाने...
-गुडग़ांव गांव की आबादी 60 हजार से अधिक है। 
-सड़क व सीवर का काम तो हुआ पर दबाव अधिक होने के कारण कहीं कहीं पर सिस्टम फेल है। 
-गांव के लोग विस्थापित हो कर सेक्टर की ओर चले गए हैं। गांव वालों ने किराये की आय को प्रमुख साधन माना है। 
-गांव में ही शीतला माता-मंदिर है। जिससे लोगों का रोजगार जुड़ा है। 
-गांव में ही द्रोणाचार्य का तालाब व आश्रम है। जो पूरी तरह से कब्जा होता चला जा रहा है। 
-गांव में सभी जाति के लोग हैं। जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं। 
गुरुग्राम की जरूरत नहीं है गुडग़ांव को सभी जानते हैं। 

गांव को विकास की और युवाओं को रोजगार की सख्त जरूरत है। गांव में सिर्फ उसी स्थान पर विकास हुआ है जहां नेता और उनके समर्थक रहते हैं। ...महेश कुमार 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें