यहां पर रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) और रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) बनाने की बात कई वर्षों से हो रही है। योजना भी तैयार कर ली गई है। इस वर्ष सितंबर में योजना को धरातल पर उतारने की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि निर्माण संबंधी फाइल अलग-अलग विभागों की अनुमति का इंतजार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगले वर्ष निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।
मानक से 100 गुना अधिक है यातायात का दबाव
तीनों फाटकों का सर्वे कराया गया है, जिसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। तीनों रेलवे फाटक पर ब्रिज बनाने कितने जरूरी हैं, इसे रेलवे के ट्रेन व्हीकल यूनिट (टीवीयू) मैथड से समझा जा सकता है। रेलवे का नियम कहता है कि जिस रेलवे फाटक का टीवीयू एक लाख से अधिक होता है, वहां रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) या रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) का निर्माण जरूरी है। किराड़ी रेलवे फाटक का टीवीयू 25.21 लाख, घेवरा का टीवीयू 33.49 लाख और नरेला रेलवे फाटक का टीवीयू 25.30 लाख है। रेलवे ट्रैक से गुजरने वाली ट्रेन संख्या व फाटक से गुजरने वाले वाहनों की संख्या के आधार पर टीवीयू निकाला जाता है।
किराड़ी रेलवे फाटक रोजाना 94 ट्रेन गुजरती हैं
किराड़ी रेलवे फाटक दिल्ली-अंबाला लाइन पर है। यहां पर रोजाना 94 ट्रेन गुजरती हैं। प्रत्येक ट्रेन के गुजरने के दौरान छह मिनट फाटक बंद किया जाता है। इस हिसाब से 24 घंटे में औसतन 8-9 घंटे फाटक यातायात के लिए बंद रहता है। इससे सुबह और शाम सबसे ज्यादा जाम लगता है। यहां पर 24 घंटे में 26,827 कई तरह के वाहन गुजरते हैं। यहां का टीवीयू 25.21 लाख है। ऐसे में यहां पर करीब 100 करोड़ रुपये की लागत में रेलवे ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव है। यह 23.2 मीटर चौड़ा और 900 मीटर लंबा होगा। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे 24 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
घेवरा रेलवे फाटक
यह फाटक भी दिल्ली-अंबाला लाइन पर ही स्थित है। यहां भी रोजाना 94 ट्रेन गुजरती हैं। प्रत्येक ट्रेन के गुजरने के दौरान छह मिनट फाटक बंद रहता है। ऐसे में 24 घंटे में औसतन 8-9 घंटे फाटक यातायात के लिए बंद रहता है। यहां पर 24 घंटे के दौरान 35,573 वाहन गुजरते हैं। यहां का 33.49 लाख है। इस फाटक में यातायात का दबाव अधिक रहता है। इससे हमेशा जाम लगा रहता है। ऐसे में यहां पर 200 करोड़ की लागत में रेलवे ओवर ब्रिज या फिर रेलवे अंडर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव है। यह 33.70 मीटर चौड़ा और 950 मीटर लंबा होगा। इसके साथ ही एक सबवे का निर्माण किया जाएगा। इसका निर्माण कार्य शुरू होने के 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नरेला रेलवे फाटक
इस रेलवे रूट पर 138 ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं। यहां पर एक ट्रेन गुजरने के दौरान आठ मिनट के लिए यातायात रोका जाता है। इससे 24 घंटे में औसतन 15 से 18 घंटे यातायात बंद रहता है। यहां पर 24 घंटे के दौरान 18,338 विभिन्न प्रकार के वाहन गुजरते हैं। यहां का टीवीयू 25.30 लाख है। यहां पर भी यातायात का अधिक दबाव रहता है। ऐसे में 60 कराेड़ की लागत में रेलवे अंडर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह 4.5 मीटर चौड़ा और 183 मीटर लंबा होगा। इसका निर्माण कार्य शुरू होने के 24 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।