वह कार मालिक कितना खुशनसीब होगा जिसे उसके कार की चाबी खुद प्रधानमंत्री दें। वो भी कोई ऐसी वैसी नहीं इंदिरा गांधी जैसी कद्दावर प्रधानमंत्री के हाथ से कार की चाबी पाकर कोई भी अपनी कार पर इठलाए बिना नहीं रह पाएगा।
इसके बाद वो कार, कार न रहकर अपने आप ही धरोहर बन जाती है। ये कहानी है एक ऐसी ही अनोखी कार की कहानी है जो भारतीय मध्य वर्ग के लिए किसी फरारी से कम नहीं थी। इसे रखना हर परिवार के लिए शान की बात थी।
हम बात कर रहे हैं भारतीय मध्यवर्ग के इतिहास का हिस्सा बन चुकी मारुति 800 की पहली कार की। पहली कार 14 दिसंबर 1983 को बनकर तैयार हुई थी। जिसकी चाबी इंडियन एयरलाइन के हरपाल सिंह ने खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथ से प्राप्त की थी। इस कार का सफर बेहद ही शानदार रहा और इसे हरपाल सिंह ने पूरी जिंदगी चलाया।
क्या खत्म हो जाएगी भारत की पहली मारुति 800?
कभी हरपाल सिंह के घर की शान रही ये मारुति 800 कार आज धीरे-धीरे अपने पतन की ओर बढ़ रही है। इसका कारण इसके मालिक हरपाल सिंह और उनकी बीवी गुलशनबीर कौर की मृत्यु है।
बता दें कि हरपाल सिंह की मौत 2010 में और उनकी पत्नी की मौत उसके दो साल बाद हो गई थी। तभी से इस दंपति का ग्रीन पार्क स्थित आवास बंद रहता है। उनकी दोनों बेटियां अपने पतियों के साथ दक्षिण दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्र में रहती हैं। इस कारण वो अपने पिता की कार का खयाल रखने में असमर्थ हैं।
इस कार को आखिरी बार करीब डेढ़ साल पहले निकाल कर चलाया गया था। एक अंग्रेजी अखबार द्वारा इस कार पर खबर छापने के बाद सोशल मीडिया जैसे ट्विटर, फेसबुक और ईमेल व फोन कॉल के माध्यम से लोग इस कार पर जैसे मेहरबान ही हो गए हैं और मारुति 800 से जुड़ी अपनी यादें भी शेयर कर रहे हैं।
मारुति कंपनी खुद खरीदना चाहती है हरपाल की 800
जिस कार को हरपाल सिंह कभी 1 लाख रुपए में भी बेचने को राजी नहीं हुए उसकी ऐसी हालत देखकर लोगों ने इस अमूल्य कार के लिए म्यूजियम तक बनाने की सलाह दी है। कई लोगों ने तो इसे खरीदने तक की इच्छा जता दी है।
इस खबर के बाद खुद मारुति कंपनी ने इस कार को हरपाल के परिवार से खरीदने की बात कही है। कंपनी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही इस बारे में हरपाल के परिवार से बात करेंगे।
क्विज मास्टर और त्रिणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य डेरेक ओब्रायन ने अंग्रेजी अखबार को संपर्क कर कार को खरीदने की इच्छा जताई है। मारुति से जुड़ी अपनी यादे बांटते हुए डेरेक कहते हैं कि 1980 के मध्य की बात है वो अभिनेता रोशन सेठ से मिलने दिल्ली आए थे और उनके पास भी मारुति 800 थी।
वह भी उस पहली लॉट की कार थी जो शुरूआत के कुछ खरीदारों को मिली थी। उन्हें याद है कि उन्हें उस कार में रोशन से बात करते हुए कितना अच्छा महसूस हुआ था। उन्हें पहली 800 को इस अवस्था में देखकर काफी दुख हुआ है।
डेरेक ओब्रायन भी खरीदना चाहते हैं हरपाल की 800
डेरेक आगे कहते हैं कि ये कार उनके लिए पुरानी यादों के गलियारे में जाने जैसा है। उनके लिए मारुति लाल फरारी से भी ज्यादा मायने रखती है।
ऑटोकार इंडिया के संपादक हॉर्मजद सोराबजी ने भी इस कार को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। उनका कहना है कि मैं चाहता हूं कि कार की भव्यता बरकरार रहे। चाहे वह मैं, उसके मालिक या मारुति कोई भी रखे।
वह बताते हैं कि वह मारुति के सबसे पुराने मॉडल के बहुत बड़े फैन हैं क्योंकि इसी पर उनके परिवार के अधिकतर लोगों ने ड्राइविंग सीखी है। सोराबजी बताते हैं कि उन्होंने हाल ही में एक मारुति 800 खरीदी है जो इसके सबसे पहले लॉट में से एक है।
परिवार चाहता है म्यूजियम में रखी जाए ये अमूल्य धरोहर
वहीं हरपाल सिंह के परिवार का कहना है कि पैसा उनके लिए प्रमुख नहीं है वो बस चाहते हैं कि उनकी कार म्यूजियम में रखी जाए। हरपाल सिंह के बड़े दामाद तेजिंदर अहलूवालिया ने बताया कि मैं लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं जो इस कार को खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं।
वह आगे कहते हैं कि लेकिन अगर पैसा उनकी प्राथमिकता होती तो उन्हें बस अखबारों में एक विज्ञापन देना होता और ढेर सारे खरीददार आ जाते। वह कहते हैं कि हम इस कार को सहेज के रखना चाहते हैं ताकि हम ससुर जी का नाम इतिहास में दर्ज करा सकें जिन्होंने जीतेजी इस कार की बेहद देखभाल की।
हरपाल के छोटे दामाद अमरदीप वालिया ने भी कार के लिए कुछ ऐसी ही भावनाएं व्यक्त कीं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मारुति से जुड़ी अपनी-अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
साभार (फोटो क्रेडिट व खबर): हिंदुस्तान टाइम्स