एनसीआर में बेरोकटोक ऑटो की आवाजाही नहीं हो पाने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फरीदाबाद से नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली जाने वाले लोगों को कम से कम दो बार ऑटो बदलना पड़ता है। समस्त ऑटो रिक्शा यूनियन के प्रधान बासदेव अहेरिया का कहना है कि इस स्थिति से यात्रियों और ऑटो संचालकों दोनों का नुकसान है।
लेकिन सर्वाधिक नुकसान यात्रियों को ही है। क्योंकि दो ऑटो बदलने के कारण उसका किराया काफी बढ़ जाता है। यह जेब कटने से कम नहीं है। यहां के लोगों को यदि नई या पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन जाकर ट्रेन पकड़नी हो तो वह दो ऑटो करते हैं।
अहेरिया का कहना है कि लंबे समय से एनसीआर परमिट वाले ऑटो सिर्फ सपने में दिखाए जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल से काफी उम्मीद थी लेकिन वह भी यह काम नहीं कर पाए।
फरीदाबाद के कम से कम तीन हजार ऑटो वाले परमिट चाहते हैं, क्योंकि यहां से हजारों लोग रोजाना दिल्ली और नोएडा जाते हैं।
श्रमिक नेता आरडी यादव कहते हैं कि यह आम आदमी से जुड़ा मसला है। इसलिए सरकार इसे बार-बार टरका रही है। खास लोग तो अपनी गाड़ियों में घूम लेते हैं। वही सरकार में हैं, इसलिए उन्हें कोई परवाह नहीं।
यहां के लोगों का दिल्ली के रेलवे स्टेशन, नोएडा एवं गाजियाबाद काफी आना-जाना होता है। ऐसे में उन्हें ऑटो को लेकर परेशानी होती है। लोगों को बदरपुर बॉर्डर पर धक्के खाने पड़ते हैं।