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विभाजन ने देश की सीमाओं के साथ हमारी सभ्यता को भी बांटा : उपराष्ट्रपति

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डीयू में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे सी.पी. राधाकृष्णन
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कुलपति ने कहा-हमें इतिहास से सीख लेनी चाहिए

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। 1947 का विभाजन सिर्फ देश की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि इससे हजारों साल पुरानी हमारी सभ्यता भी बंट गई। सिंधु नदी, करतारपुर साहिब, ननकाना साहिब, हड़प्पा व मोहनजोदड़ो जैसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भारत से अलग हो गए। अब इस देश के युवाओं का कर्तव्य है कि विकसित भारत 2027 के मिशन को साकार करने में योगदान दें। यदि हम शक्तिशाली होंगे तो सभी राष्ट्रहित सुरक्षित होंगे। यह बातें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने डीयू के स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र (सीआईपीएस) तथा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने विभाजन से बचे लोगों को सम्मानित भी किया।
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भारत का विभाजन : उजड़ने व बिछड़ने और बसने की गाथा तथा भारत विभाजन की कहानी 1947 विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। इस दौरान भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रो. रघुवेंद्र तंवर बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि हमें इतिहास से सीख लेनी चाहिए। कार्यक्रम में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद द्वारा विभाजन से जुड़ी तस्वीरों और समाचारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता ने सभी को नशा मुक्त भारत अभियान की शपथ दिलाई। इस मौके पर डीयू के कई अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
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