इस मामले को गुरुवार को हाईकोर्ट की अवकास पीठ के सामने उल्लेख किया जा सकता है। भारतीय कानून के मुताबिक, एक बंदी और कोई भी शख्स सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट से सामने अपनी याचिका दायर कर सकता है। यदि उसे लगता है कि उसकी हिरासत गैर कानूनी है। यदि कोर्ट इस संबंध में कोई निष्कर्ष निकालती है कि हिरासत गैर कानूनी है तो कोर्ट उनकी रिहाई के आदेश भी जारी कर सकती है।
पांच जनवरी तक पुलिस रिमांड
जानकारी के लिए बता दें कि 21 दिसंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संसद में हालिया सुरक्षा उल्लंघन को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज यूएपीए मामले में चार आरोपियों को 15 दिनों की अतिरिक्त पुलिस हिरासत में भेज दिया था। सात दिनों की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया था। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि सात दिन में कई अहम सबूत मिले हैं।