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भ्रष्टाचार मिटाने के लिए व्हिसिल ब्लोअर एक्ट जरूरी, संसद सत्र में चर्चा संभव

Mon, 25 Apr 2016 01:18 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : PTI
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भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले अफसरों और आमजनों की सुरक्षा का कानून व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर दो साल पहले हस्ताक्षर किए जाने के बावजूद एनडीए सरकार ने अब तक इसे कानून के तौर पर लागू नहीं किया है। मोदी सरकार संशोधनों (राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा और गलत शिकायत करने पर संबंधित पर कार्रवाई) के साथ इसे लागू करना चाहती है।
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उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार से शुरू होने वाले संसद सत्र में इस कानून पर चर्चा हो। इस एक्ट को जहां आरटीआई एक्टिविस्ट बिना संसोधन लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं भाजपा और कांग्रेस इसे लागू न हो पाने का आरोप एक-दूसरे पर मढ़ रहे हैं।

दरअसल, इस बिल में भ्रष्टाचार की जानकारी देने वाले व्यक्ति को व्हिसिल ब्लोअर माना गया। इंजीनियर सत्येन्द्र दुबे के नेशनल हाईवे मामले में फैले भ्रष्टाचार के मामले की शिकायत के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद आज भी ऐसी कई घटनाएं आए दिन हो रहीं हैं।
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राजनैतिक दल एक दूसरे पर ही कानून लागू न होने का आरोप लगाते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एम.जे. अकबर का कहना है कि केन्द्र सरकार संशोधन के साथ इस एक्ट को कानून के रूप में लागू करना चाहती है, लेकिन कांग्रेस सदन में हो-हल्ला के अलावा कुछ करती ही नहीं, इस बार सदन में कांग्रेस का साथ मिले तो यह तुरंत लागू हो जाएगा। जबकि वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा का कहना है कि केन्द्र सरकार चाहती है कि कोई भी एक्ट या बिल बिना चर्चा लागू कर दिया जाए। व्हिसिल ब्लोअर जैसे अहम कानून पर कांग्रेस समेत अन्य दलों की भी इसमें राय लेना जरूरी है।

इधर, आरटीआई एक्टिविस्टों का मानना है कि केन्द्र सरकार के संसोधन के साथ अगर यह कानून बना तो व्हिसिल ब्लोअर एक्ट किसी काम का नहीं होगा। एनसीपीआरआई के को-कन्वेनर अंजलि भारद्वाज का कहना है कि अगर सरकार इस कानून के तहत व्हिसिल ब्लोअर्स पर ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट, 1923 (ओएसए) के प्रावधानों को लागू करेगी तो भ्रष्टाचार की शिकायत करने के लिए कोई अफसर ही आगे नहीं आएगा। क्योंकि ओएसए के तहत सरकारी सूचना लीक करने के मामले में 14साल की सजा है।

वहीं कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिसिएटिव के आरटीआई प्रोग्राम कॉर्डिनेटर वेंकटेश नायक का कहना है कि सरकार अगर राष्ट्रीय सुरक्षा, अखंडता, स्रप्रुभता (आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)) का हवाला देकर इससे जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को इस कानून में शामिल नहीं करना चाहती है तो यह कानून किसी काम का नहीं होगा। जबकि इस तरह के मामलों की जांच तो सरकार को स्वयं आंतरिक स्तर पर करनी है।

300 से ज्यादा मामले व्हिसिल ब्लोअर
विभिन्न अखबारीय और आरटीआई एक्टिविस्टों के सूत्रों के मुताबिक देश भर में वर्ष 2007 से लेकर 2016 तक छोटे-बड़े भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने लगभग 50 लोगों को मार दिया गया या ऐसे हालात पैदा किए गए कि वे खुद सुसाइड कर लें। इसके अलावा इस दौरान करीब 100 मामले धमकाने के सामने आ चुके हैं। जबकि 150 से ज्यादा लोग ऐसे थे जिन्हें किसी न किसी प्रकार से तंग किया गया।

एक नजर में व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट
2010 में यूपीए सरकार पब्लिक इंटरेस्ट डिसक्लोज़र एंड प्रोटेक्शन फॉर पर्सन्स मेकिंग डिसक्लोज़र बिल लेकर आई, जिसे व्हिसल ब्लोअर बिल के नाम से जाना जाता है।
2011 में यह विधेयक लोकसभा से पारित हो गया था।
2014 में यूपीए-2 ने अंतिम समय में इस विधेयक को पारित कराने के लिए राज्यसभा में पेश किया, साथ ही भाजपा ने कुछ संशोधन पेश किए थे। संसद ने कानून को फरवरी 2014 में पारित कर दिया।
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2014(9 मई) को राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर हस्ताक्षर किए गए।
2015 में मोदी सरकार इस बिल में संशोधन लेकर आई। जिसे लोकसभा में13 मई को पास कर दिया गया।
अब यह संशोधन राज्यसभा में अटका हुआ है।
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