आप सभी को उस तीन वर्षीय मासूम जाह्नवी की याद जरूर होगी जो इंडिया गेट से खो गई और एक हफ्ते बाद वापस मिल गई थी। उसी जाह्नवी के माता पिता से गाजियाबाद और नोएडा के दो ऐसे दंपतियों ने संपर्क किया है, जिनके बच्चे गुमशुदा हो गए हैं। उन्होंने जाह्नवी के माता-पिता से अपने बच्चों को खोजने के लिए मदद मांगी है।
जाह्नवी के अंकल तरुण ग्रोवर ने एक अंग्रेजी दैनिक को दिए अपने साक्षात्कार में बताया कि 18 महीने के अभिनव सिंह और 14 साल की ज्योति के माता-पिता उनसे मिले थे।
दोनों दंपतियो ने जाह्नवी के परिवार से बच्चों की खोज में मदद करने का आग्रह किया है। मालूम हो कि अभिनव 26 सितंबर से अपने घर के बाहर से गायब है। वह अपने घर से खेलने के दौरान गायब हुआ था।
ऑटो में बैठ गई स्कूल फिर वापस नहीं लौटी ज्योति
ज्योति के पिता बाबूलाल भारती ने बताया कि उनकी बेटी भी सितंबर के शुरूआती दिनों से ही लापता है। जिस दिन ज्योति लापता हुई उस दिन सुबह घर पर एक बुक भूल जाने की वजह से उसकी स्कूल बस छूट गई थी।
पड़ोसियों ने बताया कि जल्दी स्कूल पहुंचने के लिए उसने ऑटो ली, जिसमें पहले से दो आदमी बैठे हुए थे। ज्योति के पिता का कहना है कि उस दिन से ही ज्योति का कोई अता-पता नहीं है और पुलिस का रवैया भी खासा निराशाजनक रहा है।
जाह्नवी के अंकल तरुण ग्रोवर ने बताया कि ज्योति और अभिनव दोनों के परिवारों ने मुझसे संपर्क किया है ताकि जाह्नवी की तरह उनके बच्चों को भी ढूंढा जा सके।
जाह्नवी की वापसी से ली प्रेरणा, बनाया ऑनलाइन फोरम
तरुण ने ये भी बताया कि दोनों परिवार उससे उसके ऑफिस में मिले और तरुण ने उन्हें वो तरीके बताए, जिससे मीडिया के जरिए लोगों तक गायब बच्चों की सूचना पहुंचाई जा सके।
जाह्नवी के परिवार के मित्र और उद्यमी वैभव अग्रवाल ने भी जाह्नवी की वापसी से प्रेरित होकर 'ब्रिंग बैक द लॉस्ट' नाम से एक ऑनलाइन फोरम की शुरूआत की है।
अग्रवाल बताते हैं कि मेरा ज्यादातर काम सोशल मीडिय पर आधारित है। जब 28 सितंबर को जाह्नवी खो गई थी तब उसके पिता तरुण ने मुझे बुलाया था। तब मैंने ब्रिंग बैक जाह्नवी नाम से एक फेसबुक पेज बनाया, जिसका परिणाम रहा कि जाह्नवी घर वापस आ गई।
अपनों को मिलाने का जरिया है 'ब्रिंग बैक लॉस्ट'
अग्रवाल आगे कहते हैं कि उन्हें लगता है कि एक छोटे से प्रयास से कई बिछड़े वापस मिल सकते हैं। ब्रिंग बैक जाह्नवी ने ही ब्रिंग बैक लॉस्ट फोरम को जन्म दिया। यह बहुत प्रसिद्ध फेसबुक पेज बन गया है और अब यह एक वेबसाइट भी बन गया है।
अग्रवाल आगे बताते हैं कि लोग इस वेबसाइट पर अपने खोए हुए बच्चों की पूरी डिटेल डाल सकते हैं। पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि साइट पर बच्चों से संबंधित ज्यादा से ज्यादा जानकारी हो। इसी जानकारी के आधार पर बच्चों के बारे में प्रेस रिलीज भी जारी की जाएगी।
साभारः इंडियन एक्सप्रेस