आम आदमी पार्टी (आप) की सबसे बड़ी कमेटी राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) दो नेताओं के बाहर जाने से साफ है कि अब पार्टी मॉस लीडर के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश करेगी।
वहीं, आपसी मतभेदों पर सार्वजनिक बयानबाजी भी पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। साथ ही नए विवाद से बचने के लिए पीएसी के पुनर्गठन को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया।
दरअसल, बुधवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी ठोस परिणाम देने के लिए बैठी थी। छह घंटे की बैठक में कोशिश यही रही कि फैसला इस तरह आए कि आगे किसी तरह की कयासबाजी मुमकिन न हो।
सबसे पहले अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा नामंजूर हुआ। प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव पीएसी से बाहर हुए। बावजूद इसके पीएसी के पुनर्गठन की बात नहीं हुई। जबकि पिछले महीने की बैठक में केजरीवाल को नई पीएसी बनाने का जिम्मा दिया गया था।
नहीं होगी पीएसी से छेड़छाड़
सूत्र बताते हैं कि फिलहाल मौजूदा पीएसी से छेड़छाड़ नहीं होगी। नई पीएसी बनाने में दूसरा विवाद खड़ा होने की आशंका है। उस वक्त बार फिर एक पद एक व्यक्ति की बात उठेगी।
इससे दिल्ली सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया व गोपाल राय को पीएसी से हटाने की मांग जोर पकड़ेगी। साथ ही केजरीवाल पर नैतिक दबाव बनाया जाएगा। इससे दूसरा विवाद खड़ा होगा। फिलहाल दोनों पद खाली रहेंगे।
आगे सारा मामला शांत होने के बाद अगर जरूरत हुई तो पीएसी में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे नेताओं को भी संदेश दिया गया कि अब आपसी मतभेदों को सार्वजनिक करना संभव नहीं रहा।
प्रशांत-योगेंद्र को मिला समर्थन
राकेश सिन्हा, अजीत झा, क्र्तिरिस्टना सामी, योगेन्द्र यादव, आंनद कुमार, सुभाष वारे, आशा पंत, प्रशांत भूषण
मंयक गांधी, दिनेश वघेला, कृष्णाकांत, नवीन जयहिंद, प्रेम सिंह पहाड़ी, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, संजय सिंह, पंकज गुप्ता, योगेश दहिया, होवॉग पियाग
लोग कह रहे हैं आपने प्रशांत भूषण-योगेंद्र यादव के खिलाफ वोट दिया। हम नेताओं को एक रखने में कामयाब नहीं हो सके।
मयंक गांधी, आप नेता