दिल्ली की गर्मी ने सांस व अस्थमा रोगियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। एक अध्ययन के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में तेजी से चढ़ते पारे ने दिल्ली की आबोहवा में ओजोन की मात्रा बढ़ा दी है।
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कई इलाकों में यह मानक से तीन गुना तक ज्यादा है। लिहाजा बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। अध्ययन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने किया है। इसे सोमवार को जारी किया गया है।
सीएसई ने आवासीय इलाकों आरके पुरम, सिविल लाइंस, मंदिर मार्ग व पंजाबी बाग के साथ आईजीआई पर ओजोन की मात्रा पर स्टडी की। इसका समय जनवरी-जून के पहले सप्ताह का था।
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दिखी बेहद डरावनी तस्वीर
सीएसई ने आंकड़े दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) की वेबसाइट से लिए गए। अध्ययन में तस्वीर बेहद डरावनी दिखी। इस बीच ओजोन की मात्रा लगातार बढ़ रही। सबसे बदतर हालात जून केपहले सप्ताह केहैं।
एक जून को 35 डिग्री सेल्सियस तापमान के 6 जून को 44 डिग्री तक पहुंचते ही ओजोन की मात्रा तेजी से बढ़ी। सिविल लाइन में 87 फीसदी, पंजाबी बाग में 171 फीसदी, मंदिर मार्ग 315 फीसदी व आईजीआई एयरपोर्ट पर 82 फीसदी ज्यादा हो गया।
वहीं, ओजोन की औसत मात्रा एक जून के 73 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर से बढ़कर 150 पर पहुंच गई। जबकि मानक सौ माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर है।
दिल्ली को चेतावनी
सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी के मुताबिक, दिल्ली को चेतावनी है। ओजोन का औसत भले ही कम दिखे, लेकिन इस दौरान कई मौकों और तमाम जगहों पर ओजान की मात्रक मानक से 2.5 से तीन गुना ज्यादा थी।
हालात इससे भी बदतर होते, अगर मार्च-मई में बीच-बीच में बारिश न हो जाती। इसकी बड़ी वजह वाहन प्रदूषण है।
खास तौर से डीजल से चलने वाले वाहनों से, पेट्रोल के वाहन की तुलना में जिनसे तीन गुना ज्यादा नॉक्स निकलता है। एक जगह पर थोड़े समय के लिए ओजोन की इतनी मात्रा बेहद नुकसानदेह होती है।
गर्मियों में ऐसे बनता बेहद खतरनाक ओजोन
ओजोन कहीं से खुद नहीं निकलती। यह नाइट्रोजन के ऑक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, हाइड्रो कार्बन उच्च तापमान में क्रिया करके बनाती है। तापमान ज्यादा होते से ओजोन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। वहीं, सर्दियों में ओजोन का स्तर नियंत्रित रहता है।
ओजोनयुक्त वातावरण में कुछ घंटों के भीतर सेहत होती खराब। श्वसन व अस्थमा के मरीजों को बड़ी दिक्कत। फेफेड़ों पर पड़ता असर, ऊतक होते क्षतिग्रस्त। पैदा होता सीने में दर्द, कफ की समस्या, सिरदर्द।
ब्रोंकाइटिस और एम्फजीम के रोगियों की भी बढ़ी समस्या। ओजोन के आक्सीकारक होने से कोशिकाओं को भी होता नुकसान। बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे वातावरण से बचने की जरूरत।
मैक्सिको, अमेरिका व चीन समेत कई युरोपीय देशों में नियमित तौर पर जारी होता हेल्थ अलर्ट। ओजोन बढ़ते ही मैक्सिको शहर में बच्चों, बुजुर्गों व सांस के रोगियों को दी जाती बाहर निकलने की मनाही।
दिल्ली के लिए जरूरी डीजल से चलने वाले वाहनों पर रोक। वाहनों की संख्या में कमी लाने के लिए बड़े स्तर पर योजना।
ऐसे इलाकों में जहां के वातावरण में ओजोन बहुत ज्यादा है, वहां डीजल व पेट्रोल की जगह ग्रीन फ्यूल वाले वाहनों के चलने की हो इजाजत। हेल्थ बुलेटिन जारी हो, खास तौर से वहां के लिए जहां सांद्रण बहुत ज्यादा है।