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आदेश: राजधानी में नहीं जलना चाहिए कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक

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वायु प्रदूषण पर सख्त नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने दिल्ली नगर निगमों और प्राधिकरणों को कहा है कि वे आदेशों का अनुपालन सख्ती से करें। आदेश के बावजूद राजधानी में बिल्डर्स सड़कों पर निर्माण सामग्री और मलबा रख रहे हैं।
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कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक भी जलाया जा रहा है। निगम इस मामले पर क्या कर रहे हैं?। इस पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ओर से पेश काउंसिल ने जानकारी दी कि आदेश का उल्लंघन करने वाले सभी बिल्डर्स का 50 हजार रुपये का चालान काटा गया है।

इस पर बेंच ने इन सभी बिल्डर्स को नोटिस जारी कर तलब किया है। साथ ही चेताया है कि कूड़ा और प्लास्टिक जलाने पर प्राधिकरण लगाम लगाएं।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि दिल्ली के सभी निगम यह सुनिश्चत करें कि राजधानी के किसी भाग में कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक नहीं जलना चाहिए।
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आदेश का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये जुर्माना

एनजीटी ने सभी नगर निगम और दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वे पर्यावरण से संबंधित वसूले गए जुर्माने के लिए एक अलग खाता तैयार करें। इसका इस्तेमाल पर्यावरण के संरक्षण और बचाव को लेकर किया जाएगा।

मालूम हो कि दिल्ली में आबो-हवा से संबंधित मामले पर एनजीटी फिर से सुनवाई कर रहा है। इस संबंध में हाल ही में दिए गए आदेशों के अनुपालन को लेकर एनजीटी ढील बरतने के मूड में नहीं है।

बीते वर्ष 28 अप्रैल को ट्रिब्युनल ने खुले में कूड़ा जलाने पर 5000 रुपये का जुर्माना वसूलने का निर्देश दिया था। वहीं, हाल ही में बिल्डर्स द्वारा आदेश का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये जुर्माना वसूलने को कहा था।
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