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Delhi NCR News: हर पांचवां नवजात कम वजन के साथ जन्मा

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दिल्ली में वर्ष 2024-25 में करीब 2.68 लाख नवजातों का जन्म हुआ, इनमें 58,741 का वजन ढाई किलोग्राम से कम रहा
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डॉक्टरों के अनुसार, कम जन्म वजन का मतलब हर बार कुपोषण नहीं होता

अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। दिल्ली में हर साल लाखों बच्चों का जन्म होता है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे नवजातों की भी है, जिनका जन्म के समय वजन सामान्य से कम रहता है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष के दौरान दिल्ली में करीब 2.68 लाख नवजातों का जन्म हुआ। इनमें 58,741 नवजातों का जन्म के समय वजन 2.5 किलोग्राम से कम था।
डॉक्टरों के अनुसार, कम वजन के साथ पैदा होने वाले हर बच्चे को कुपोषित मानना सही नहीं है। जन्म के समय कम वजन के कई कारण हो सकते हैं। इनमें गर्भावस्था के दौरान मां को पर्याप्त पोषण न मिलना, समय से पहले प्रसव, गर्भ में बच्चे की वृद्धि रुकना, मां में एनीमिया या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं। धूम्रपान और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जटिलताएं भी बच्चे के वजन को प्रभावित कर सकती हैं।
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जीटीबी अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि ढाई किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाले नवजात को सामान्य वजन की श्रेणी में रखा जाता है, जबकि इससे कम वजन को कम जन्म वजन माना जाता है। ऐसे बच्चों को जन्म के बाद विशेष देखभाल, पर्याप्त पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच की जरूरत होती है। वह बताते हैं कि कि बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए गर्भावस्था के दौरान मां का खानपान और स्वास्थ्य बेहद महत्वपूर्ण है। गर्भवती महिलाओं को संतुलित और पर्याप्त पोषण लेने के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। इससे गर्भ में बच्चे की वृद्धि पर नजर रखने और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान करने में मदद मिल सकती है।
ढाई से साढ़े तीन किलो तक सामान्य वजन
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, समय पर जन्म लेने वाले नवजात का वजन आमतौर पर ढाई से साढ़े तीन किलोग्राम के बीच रहता है। जन्म के समय ढाई किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चे को कम जन्म वजन की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे नवजातों को सामान्य वजन वाले बच्चों की तुलना में अधिक निगरानी और देखभाल की जरूरत हो सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जन्म के समय लड़कों का औसत वजन करीब 3.3 किलोग्राम और लड़कियों का करीब 3.2 किलोग्राम बताया गया है।
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पांच साल में नवजात मृत्यु दर में बढ़ोतरी
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग सालाना रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में नवजात मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2019 में यह दर करीब 11 फीसदी थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर करीब 12 फीसदी हो गई। वर्ष 2022-23 और 2023-24 में भी यह आंकड़ा करीब 12 फीसदी रहा। वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में वर्ष 2023 के आंकड़ों के आधार पर नवजात मृत्यु दर करीब 14 फीसदी दर्ज की गई। ऐसे में कम वजन वाले नवजातों की समय पर पहचान, उपचार और जन्म के बाद उचित देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
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