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अफसरों के ‘खेल’ में विज्ञापन नीति फेल

Mon, 02 Jun 2014 07:48 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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शासन ने भले ही नगर निगमों को विज्ञापन नीति तैयार करने के आदेश दे रखे हों, लेकिन अफसरों के ‘खेल’ में गाजियाबाद की विज्ञापन नीति ‘फेल’ हो गई।
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यह विज्ञापन नीति वर्ष 2013 में ही निगम सदन में पास होनी थी। अफसरों की लेटलतीफी में यह अभी तक सदन में पास नहीं हो सकी। अगस्त 2014 तक निगम ने विज्ञापन नीति सदन में पास कराकर शासन से इस पर मंजूरी न ली तो इस साल फिर निगम ठेका नहीं छोड़ सकेगा।

शहर में विज्ञापन के लिए फिलहाल कोई नियमावली नहीं है। यह नियमावली बनने तक निगम नया ठेका नहीं छोड़ सकेगा। इसी वजह से निगम को बीते साल पुरानी फर्म के ही ठेके का नवीनीकरण महज पौने चार करोड़ में करना पड़ा। शहर में अभी बड़ी तादाद में अवैध विज्ञापन का खेल चल रहा है।
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इतने विज्ञापनों से निगम को हर साल 20 करोड़ रुपये की इनकम हो सकती है। निगम अधिकारियों ने नवंबर 2013 तक नियमावली तैयार कराकर शासन को भेजने का दावा किया था। लेकिन 10 महीने बाद तक भी यह शासन को नहीं भेजी जा सकी है।
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निगम सूत्रों का कहना है कि अफसर और शहर के कुछ कद्दावर नेता ही इस नियमावली को पास नहीं होने देना चाहते। ऐसे में यह नियमावली लगातार लेट हो रही है। यह नियमावली पास हुई तो कई बड़े नेताओं के साथ-साथ अफसरों की इनकम भी बंद हो जाएगी।
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