सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका दायर कर सम-विषम योजना को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि यह स्कीम संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। गत चार नवंबर से दिल्ली में सम-विषम स्कीम शुरू हुई जो 15 नवंबर तक चलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी गत सोमवार को इस योजना पर सवाल उठाते हुए सरकार से ब्योरा मांगा था। शीर्ष कोर्ट इस मामले में अब शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
नोएडा निवासी वकील संजीव कुमार ने जनहित याचिका में कहा, यह संविधान के तहत नागरिकों को मिले समानता का अधिकार और देश में कहीं भी आने-जाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। लिहाजा इसे असांविधानिक करार दिया जाए। उन्होंने कहा, दिल्ली के आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों को काम के सिलसिले में राजधानी आना पड़ता है। ऐसे में इन नियम से इन्हें भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण यह स्कीम लाई गई जबकि दिल्ली व केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड का मानना है कि पहले जब भी सम-विषम दिल्ली में लागू हुआ इससे राजधानी का प्रदूषण कम नहीं हुआ है।
याचिका में कहा गया कि यह योजना सिर्फ कारों पर लागू है जबकि दुपहिया वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। इसके अलावा इसमें महिला एवं पुरुषों को लेकर भी भिन्नताएं हैं। महिला कार चालकों को इस नियम से राहत दी गई है। इसलिए यह प्रदूषण के लिए नहीं बल्कि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए लाई गई स्कीम है।