दिल्ली के निजी स्कूलों में दाखिले के लिए स्कूलों में लॉटरी की प्रक्रिया जारी है। जहां कुछ स्कूलों ने लॉटरी निकाल दी है, वहीं कुछ स्कूल अगले दो दिनों में इस प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे। स्कूलों ने लॉटरी के नाम पर अपनी मनमानी शुरु कर दी है।
कोरोना संक्रमण के कारण जहां कुछ स्कूल वर्चुअल लॉटरी तो कुछ स्कूल में लॉटरी निकाल रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि दोनों ही माध्यमों से निकाली जा रही लॉटरी में स्कूल पारदर्शिता नहीं बरत रहे हैं। वहीं कुछ जगह वीडियोग्रॉफी भी नहीं की जा रही है।
कई स्कूल अभिभावकों को बिना बताए ही लॉटरी निकाल रहे हैं। वहीं लॉटरी में वीडियोग्राफी भी नहीं की जा रही है। उल्लेखनीय है कि नर्सरी दाखिले के लिए पहली सूची 04 फरवरी को जारी होनी है। इससे पहले आवेदन फॉर्म की छंटनी केबाद अब स्कूलों ने लॉटरी करना शुरु कर दिया है।
करीब पचास से अधिक स्कूल लॉटरी निकाल चुके हैं। बुधवार को कई नामी स्कूलों डीपीएस ईस्ट ऑफ कैलाश, हैरिटेज स्कूल वंसत कुंज, मॉडर्न स्कूल वंसत विहार, लक्ष्मण पब्लिक स्कूल हौज-खास, एपीजे स्कूल पंचशील समेत कई अन्य स्कूलों ने लॉटरी निकाली।
गुरुवार को श्रीराम स्कूल, टैगोर इंटरनेशनल स्कूल वंसत विहार समेत अन्य स्कूल लॉटरी निकालेंगे। जिसकेबाद चार फरवरी को प्रतीक्षा सूची के साथ दाखिले की पहली सूची जारी होगी। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि जिन स्कूलों में लॉटरी हो गई है, उनमें से कुछ स्कूलों की मनमानी की शिकायत अभिभावक उनकी फोरम पर कर रहे हैं।
अभिभावकों केअनुसार स्कूलों की ओर से चुपचाप लॉटरी निकाली जा रही है। लॉटरी निकालने का पता अभिभावकों को बाद में चल रहा है। जहां स्कूल में लॉटरी निकाली जा रही है वहां अभिभावकों को फोन ले जाने से मना किया जा रहा है।
कोरोना का बहाना बना स्कूल वर्चुअल लॉटरी कर रहे हैं जिससे कि अभिभावकों को बुलाना ही नहीं पड़े। इससे अभिभावकों को संश्य है कि सूची में उनके बच्चे का नाम होगा या नही। मालूम हो कि शिक्षा निदेशालय की ओर से कहा गया था कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्कूल में लॉटरी निकाली जाए। जो लॉटरी में आने के इच्छुक हों उन्हें स्कूल बुलाया जाए। इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की हिदायत भी दी गई है।
डोनेशन के रूप में 40 हजार से तीन लाख रुपये तक मांग रहे
लॉटरी केसाथ ही स्कूलों ने डोनेशन मांगने का खेल भी शुरु कर दिया है। सुमित वोहरा ने बताया कि कुछ स्कूल डोनेशन केलिए 40 हजार से तीन लाख रुपये तक की मांग अभिभावकों से कर रहे हैं। स्कूल हर साल डोनेशन मांगते हैं और अभिभावक परेशान होते हैं। लेकिन शिक्षा निदेशालय कोई कार्रवाई नहीं करता है। अभिभावकों की परेशानी को समझते हुए ऐसे स्कूलों के खिलाफ निदेशालय को कार्रवाई करनी चाहिए।