दिल्ली सरकार का कानून विभाग मंत्रियों को रास नहीं आ रहा है। अरविंद केजरीवाल ने युवा मंत्री कपिल मिश्रा से कानून विभाग छीनकर सबसे विश्वासपात्र व करीबी मनीष सिसोदिया को सौंप दिया है।
मिश्रा को पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के फर्जी डिग्री मामले में फंसने के बाद मंत्री बनाया गया था। उपराज्यपाल नजीब जंग ने 15 जून को कपिल मिश्रा को मंत्री पद की शपथ दिलवाई थी। मंत्री बनाते समय आप सरकार की तरफ से युवा और ऊर्जावान होने का हवाला देकर कानून सहित कई मंत्रालय उन्हें सौंपे गए थे।
महज ढाई महीने में ऐसा क्या हुआ कि उन्हें हटाना पड़ा। अब मिश्रा के पास पर्यटन, जल, गुरुद्वारा चुनाव और कला-संस्कृति और भाषा विभाग की जिम्मेदारी है।
कपिल ने पत्र में लिखा था मेरी कुर्सी भी जा सकती है
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार कानून विभाग की जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ साथी के कंधों पर डालना तय हुआ। इसके अलावा पर्यटन और जल बोर्ड को मंत्री अधिक समय दे सकें इसलिए कपिल मिश्रा से कानून विभाग का चार्ज लेकर सिसोदिया को दिया गया है।
कपिल मिश्रा ने 28 अगस्त को जल बोर्ड में टैंकर खरीद मामले की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी। इसके साथ लिखी गई चिट्ठी में जिक्र किया था कि मामला ऐसे लोगों से जुड़ा है कि सरकार को अस्थिर किया जा सकता है।
इतना ही नहीं मेरी कुर्सी भी जा सकती है। अब यह कहा जा रहा है कि कुछ इसी तरह का अंदेशा कपिल मिश्रा को रहा होगा, जिसके कारण पत्र में पद से हटाए जाने का जिक्र किया हो।
कुर्सी वही रही बदलते गए नाम
वहीं सूत्र बता रहे हैं कि उपराज्यपाल के साथ उलझे कानूनी मसले और सर्किल रेट विवाद का समाधान करने में असफलता विभाग छिनने का एक कारण है।
आम आदमी पार्टी की पहली सरकार में सोमनाथ भारती कानून मंत्री बनाए गए थे, जिनके पास कानून की डिग्री भी थी। मालवीय नगर में मिड नाइट रेड के चलते उन्हें पद से हटना पड़ा।
दूसरे नंबर पर जितेंद्र तोमर कानून मंत्री बनाए गए तो उनकी डिग्री फर्जी निकली। इसके बाद कपिल मिश्रा को यह विभाग दिया गया, जो अपने हटने का अंदेशा 28 अगस्त को ही जता चुके थे। अब मनीष सिसोदिया को यह चार्ज दिया गया है।