- भट्टा और पारसौल गांवों में 1326 प्लाॅट पर किसानों से बनी सहमति, 25 जुलाई से जारी होगा मुआवजा
- 2009 में आई थी 2100 प्लॉटों की योजना, भुगतान के बाद भी नहीं जारी किए जा सके थे प्लाॅट
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। किसानों के विरोध से सुर्खियों में आए भट्टा और पारसौल गांव में आवंटित किए गए प्लॉट पर घर बनाने का सपना 15 वर्ष बाद पूरा होने वाला है। यमुना प्राधिकरण (यीडा) दिसंबर तक आवंटियों को यहां पजेशन देने की तैयारी में है। यीडा ने किसानों से सहमति के आधार पर यहां जमीन खरीद ली है। यह यीडा की पहली योजना थी जो 15 वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो पाई थी।
दरअसल, भट्टा और पारसौल गांव में यीडा ने सेक्टर-18 और 20 के आवासीय क्षेत्र को विकसित करने की योजना बनाई थी। इसके लिए वर्ष 2009 में किसानों की जमीन को धारा-चार और छह तथा नौ की कार्रवाई करके प्राधिकरण ने अधिग्रहण कर लिया। किसानों के विरोध और मामला न्यायालय में होने की वजह से प्राधिकरण को कब्जा नहीं मिल पाया। इससे 2100 आवंटियों को भुगतान के बाद भी पजेशन नहीं दिया जा सका। यीडा ने किसानों से वार्ता जारी रखकर कुछ वर्ष पहले 800 आवंटियों को कब्जा दिलाया था। अब प्राधिकरण ने शेष 1326 प्लॉटों पर कब्जे की प्रक्रिया पूरी कर किसानों को मुआवजे के लिए राजी कर लिया है।25 जुलाई से किसानों का मुआवजा जारी होना शुरू हो जाएगा। अहम है कि वर्ष 2009 में योजना बनाते समय यीडा के अधिकारियों ने कार्यालय में बैठकर सेटेलाइट सर्वे कर लिया था। इसमें किसानों की जमीन पर आबादी है या नहीं इसका भी ध्यान नहीं रखा गया।
700 रिट खत्म, अब 16 पर होना है फैसला
दोनों गांवों में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ 719 रिट न्यायालय में हुई थी। यीडा की ओर से वार्ता और सहमति के आधार पर इन्हें खत्म कराया गया। पारसौल गांव में 55 रिट बची थी, मगर इनसे भी सहमति बना ली गई है। अब 16 रिट और प्राधिकरण के खिलाफ बची हैं।
कोट
वर्ष-2009 में भट्टा और पारसौल में लाई गई स्कीम में 2100 आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पाया था। कुछ वर्ष पहले यीडा ने 800 आवंटियों को कब्जा दिया था। शेष 1326 प्लॉट तैयार कर लिए गए हैं। जल्द ही कब्जा दिया दिया जाएगा। इस तरहयीडा की पहली योजना पूरी तरह से सफल हो गई है। - डाॅ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यीडा