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विधानसभा को डिजिटल बनाने की दिशा में काम हुआ : विजेंद्र गुप्ता

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विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- ई-विधान प्रणाली का विस्तार, सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के कदम उठाए जा रहे
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
आठवीं विधानसभा के दूसरे सत्र का समापन हो चुका है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें ई-विधान प्रणाली का विस्तार, सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई समितियों का गठन शामिल हैं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में कहा कि आदर्श विधानसभा विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
इस बार के सत्र में विधानसभा की सभी कार्यवाहियों को डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से काम हुआ। राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) को लागू करने की प्रक्रिया तेज की गई, ताकि सभी विधायी कार्य ऑनलाइन किए जा सकें। विधानसभा को सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। वर्तमान में 100 किलोवाट के दो सौर संयंत्र कार्यरत हैं, लेकिन विधानसभा की कुल ऊर्जा आवश्यकता 600 किलोवाट है। अगले 100 दिनों में अतिरिक्त सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना बनाई गई है। इससे विधानसभा को पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी पर निर्भर बनाया जा सकेगा ओर प्रतिमाह 15 लाख रुपये की बचत होगी।
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सत्र में वार्षिक बजट, सीएजी रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा हुई, लेकिन विपक्ष चर्चाओं में शामिल नहीं हुआ। बिजली संकट पर विपक्ष की ओर से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन जब चर्चा हुई, तो विपक्ष के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। विधानसभा में अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए गए। अब विधानसभा परिसर में धरना-प्रदर्शन करने वाले विधायकों को पूरे सत्र के लिए निष्कासित करने का नियम लागू किया गया है। यह निर्णय विधानसभा की कार्यवाही को बाधित होने से बचाने के लिए लिया गया है।
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सात बैठकों की 27 घंटे 56 मिनट कार्यवाही चली
विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि विधानसभा सत्र में सात बैठकें हुईं और 27 घंटे 56 मिनट की कार्यवाही चली। इस दौरान वार्षिक बजट पारित करने से लेकर सीएजी की छह रिपोर्ट पेश करने तक कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया, जिस पर 7 घंटे 13 मिनट तक चर्चा चली और 36 विधायकों ने विचार रखे। सत्र में लंबे अंतराल के बाद प्रश्नकाल भी शुरू किया गया। सचिवालय को 384 नोटिस मिले, जिनमें से 80 तारांकित और 282 अतारांकित प्रश्नों के रूप में स्वीकार किए गए। सरकार ने 28 तारांकित प्रश्नों और 66 अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर सदन में दिए। नियम 280 के तहत विशेष उल्लेख के लिए 267 नोटिस मिले, जिनमें से 78 मामलों को सदन में उठाया गया। सीएजी की छह रिपोर्ट सदन में पेश की गईं और इन पर 26 सदस्यों ने 5 घंटे 32 मिनट तक चर्चा की।
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