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Noida News: ओखला पक्षी विहार में जलकुंभी बनी पक्षियों के लिए जीवनरेखा

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नोएडा के ओखला पक्षी विहार की झील में फैली जलकुम्भी  ।  अमर  उजाला
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फोटो है
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- नदियों में प्रदूषण का कारण मानी जाने वाली जलकुंभी परिंदों को दे रही निवाला
-जलकुंभी की जड़ों में छिपे कीट और घोंघे बने पक्षियों का पसंदीदा निवाला, तैरती पत्तियां बनीं आरामगाह


माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नदियों और झीलों में आमतौर पर प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली जलकुंभी ओखला पक्षी विहार में आने वाले हजारों स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन और सुरक्षा की जीवनरेखा साबित होती है। ओखला पक्षी विहार में इन दिनों स्थानीय पक्षी जलकुंभी की मदद से निवाले ले रहे हैं लेकिन आने वाले दिनों में प्रवासी पक्षी भी जलकुंभी की मदद से अपना भोजन ग्रहण कर सकेंगे।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जलकुंभी पानी की सतह को ढककर धूप रोकती है और ऑक्सीजन का स्तर घटाती है, जिससे पानी के भीतर की मछलियां मर जाती हैं, लेकिन ओखला पक्षी विहार में इसकी मोटी चादर पक्षियों के लिए किसी बुफे से कम नहीं है। जलकुंभी की उलझी हुई घनी जड़ों में भारी तादाद में घोंघे, लार्वा, छोटे केकड़े, जल-कीट और सूक्ष्म जीव पनपते हैं। सर्दियों में साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आने वाले प्रवासी परिंदों के लिए यह सबसे पौष्टिक और आसानी से मिलने वाला भोजन बन जाता है।
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डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि यह माना जाता है कि जलकुंभी को जलाशयों से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए, लेकिन ऐसा करना पक्षियों की संख्या पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। सर्दियों के मौसम में भारी संख्या में आने वाले प्रवासी पक्षी, विशेष रूप से गूस और कुछ अन्य प्रजातियां, जलकुंभी और उसके फलों को खाकर अपना पोषण करती हैं। यदि इसे 100% साफ कर दिया जाए, तो इन प्रवासी पक्षियों की आमद घट सकती है।
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डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि पक्षी हमेशा अपने बच्चों को जन्म देने और प्रजनन के लिए ऐसी जगहों को प्राथमिकता देते हैं जहां इंसानों, कुत्तों या अन्य शिकारी जानवरों का कोई दखल न हो। पानी के बीच तैरती जलकुंभी की मदद से पक्षियों के लिए सुरक्षित फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म और घोंसले बनते हैं।

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-बगुले, ईग्रेट और स्टॉर्क - जलकुंभी के तैरते टीलों पर खड़े होकर आसानी से छिपे कीड़ों और मेंढकों का शिकार करते हैं।

-टील, गैडवाल और पोचार्ड (बतखें) - पानी की सतह पर तैरती जलकुंभी को पलटकर उसकी जड़ों में चिपके सूक्ष्म जीवों को खाती हैं।

-मूरहेन और पर्पल स्वैम्पहेन - जलकुंभी की हरी पत्तियों के बीच सुरक्षित घोंसले बनाने और छिपने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।
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