नोएडा। जिले में कोविड टीकाकरण का आंकड़ा 43 लाख छूने को तैयार है। आबादी के लिहाज से लक्ष्य के मुकाबले 93 फीसदी लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं, लेकिन सात फीसदी आबादी अब भी इससे वंचित है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों और बुजुर्गों की है। स्वस्थ समाज-स्वस्थ देश के निर्माण के लिए अमर उजाला ने एक बार फिर टीकाकरण के प्रति जागरूकता की मुहिम को आगे बढ़ाया है। इसी कड़ी में समाज के जागरूक लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने लापरवाही छोड़कर सभी लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की।
वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित
पद्मश्री एवं पद्मभूषण मूर्तिकार रामसुतार ने बताया कि दूसरी लहर में जिस तरह हालात बिगड़े थे, अगर वैक्सीन नहीं आती तो और भी ज्यादा भयावह हालात बन सकते थे। मैं वैक्सीन की दो डोज पहले ही लगवा चुका हूं। अब बूस्टर डोज लगवाने की तैयारी कर रहा हूं। कोरोना से बचाव की वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसे लगवाने में किसी तरह की देरी न करें।
वैक्सीन और मास्क ने ही बचाया
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि शुरुआत में वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां थीं, उस समय सबसे पहले मैंने वैक्सीन लगवाकर स्वास्थ्य कर्मियों व फ्रंटलाइन वर्कर का आत्मविश्वास बढ़ाया था। अब बूस्टर डोज भी लगवा चुका हूं। वैक्सीन और मास्क की वजह से ही संक्रमण से बच पाया। हर व्यक्ति को परिवार के सभी सदस्यों के साथ वैक्सीन लगवानी चाहिए।
संक्रमण रोकने का सुरक्षित हथियार
फिल्म अभिनेत्री जॉयश्री अरोड़ा ने बताया कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और संक्रमण को रोकने का मुख्य हथियार है। कुछ समय पहले मुझे कोरोना हुआ था, लेकिन वैक्सीन का ही असर था कि जिंदगी बच गई। वैक्सीन ने देश में लाखों की जान बचाई हैं, कई सर्वे भी इस बात की गवाही दे चुके हैं। साथ ही, समाज ने सावधानी, संवेदनशीलता और संयम के दृढ़ संकल्प के साथ महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ी है।
खुद लगवाई और दूसरों को किया प्रेरित
अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता नागर ने बताया कि कोरोना काल में जब वैक्सीन आई तो गांव में सबसे पहले मैंने वैक्सीन लगवाई और दूसरों को भी जागरूक किया। साथ ही, एकेडमी के सभी प्रशिक्षुओं को और परिवार के सदस्यों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया। तीसरी लहर में संक्रमित भी हुई, लेकिन वैक्सीन ने बचा लिया। कोरोना से बचाव का सिर्फ वैक्सीन ही विकल्प है, इसलिए जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी है वेे जल्द लगवाएं।
कम हुआ संक्रमण का असर
सेवानिवृत्त आईएएस योगेंद्र नारायण ने बताया कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी लोगों को संक्रमण हुआ है, लेकिन दुष्प्रभाव कहीं सुनने को नहीं मिला। जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है, उनमें कोरोना के बेहद हल्के लक्षण देखे गए। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए वैक्सीन का सुरक्षा कवच हर किसी को अपनाना चाहिए। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को समय पर पहली व दूसरी डोज लगवाएं। घर के बुजुर्गों को वैक्सीन लगवाने में किसी तरह की कोताही न बरतें।
विश्व के लिए संजीवनी बनी वैक्सीन
फैशन डिजाइनर व अंतरराष्ट्रीय अवार्ड विजेता नीतू सिंह ने बताया कि वैक्सीन पूरे विश्व के लिए संजीवनी साबित हुई है। पिछले दिनों एक रिपोर्ट में पढ़ा था कि वैक्सीन की वजह से भारत में ही 42 लाख से अधिक लोगों की जान बची। जनवरी से लेकर अब तक कोरोना बार-बार नए रूप में लौटकर आया, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं दिखा। यह वैक्सीन की वजह से ही संभव हो पाया। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। घर के बच्चों और बुजुर्गों को वैक्सीन जरूर लगवाएं।