जेवर और दादरी विधानसभा में जातिगत समीकरण पर मोदी-योगी का नाम भारी पड़ गया। भारतीय जनता पार्टी के विजेता प्रत्याशियों को जमकर वोट मिले। चुनाव के आगाज पर सपा-बसपा और रालोद ने जातीय समीकरण की बिसात बिछाई। लेकिन यह समीकरण भी उनको जीत नहीं दिला सका। खास बात यह कि सभी वर्ग के वोटों में भाजपा ने सेंध लगाई, जिससे विपक्ष का खेल पलट गया।
जेवर से भाजपा के विधायक धीरेंद्र सिंह को घेरने के लिए राष्ट्रीय लोकदल ने गुर्जर कार्ड खेला। जाट, गुर्जर और मुस्लिम समीकरण के सहारे भड़ाना ने चुनाव के दौरान खूब तीखे बोल बोले। यहां तक कहा जाने लगा कि भड़ाना का जादू क्षेत्र में जमकर चल रहा है। इससे उत्साहित होकर कुछ अन्य वर्ग भी भड़ाना को साथ दे रहे हैं। लेकिन चुनाव परिणामों ने इस समीकरण की हवा निकाल दी। अगर आंकड़ों पर भी गौर करेंगे तो भड़ाना को मिले 60890 वोट जातीय समीकरण पर खरे नहीं उतर रहे। यानी पहले से जो समीकरण बनाए गए थे। उनमें भाजपा ने सेंध लगाई या विपक्ष योजना में सफल नहीं हो सका।
वहीं, बहुजन समाज पार्टी से नरेंद्र भाटी ने दलित कार्ड खेला था। साथ ही गुर्जरों के अलावा दूसरी जातियों के वोट मिलने का भरोसा जताया था। लेकिन नरेंद्र भाटी डाढ़ा को 45256 वोट मिले, जो कि उम्मीद से काफी कम रहे। बसपा की ओर से यह दावा किया जाता रहा कि दलित वोट बैंक के सहारे नैया पार लगेगी। लेकिन आखिरी चुनाव परिणाम जातीय समीकरण पर भारी पड़ गया। यही वजह है कि धीरेंद्र सिंह ने 117205 वोट पाकर अवतार भड़ाना को हरा दिया।
नागर को मिले 218068 वोटों ने तोड़ा रिकॉर्ड, सारे समीकरण ध्वस्त
दादरी से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी तेजपाल नागर को 218068 वोट मिले, जो कि पहले के मिले वोटों से काफी ज्यादा है। एक समय ऐसा भी था कि क्षेत्र में तेजपाल नागर के टिकट कटने की चर्चा जोरों पर थी। यही वजह है कि भाजपा के कई नेताओं ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की खूब दौड़ लगाई। ऐसा लगा कि इस बार टिकट कट जाएगा। लेकिन आखिर में आलाकमान ने नागर पर भरोसा जताया। नागर ने आलाकमान के भरोसे को टूटने नहीं दिया और रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। दादरी विधानसभा में भी समाजवाटी पार्टी की ओर से गुर्जर और मुस्लिम कार्ड खेला गया था। इसके सहारे जीतने का दावा किया गया था। क्षेत्र में नागर के विरोध की भी हवा उड़ाई गई। लेकिन सपा के राजकुमार भाटी को 79850 वोट मिले। वहीं, बसपा के मनवीर भाटी ने करीब ढाई लाख फ्लैट खरीदारों का विश्वास जीतने के लिए काफी मेहनत की थी। वह बसपा के दलित कार्ड को ट्रंप कार्ड मानते हुए चुनाव मैदान में उतरे थे। लेकिन मनवीर भाटी को भी केवल 40456 वोट मिले। आखिरकार सभी जातीय व अन्य समीकरणों को धता बताते हुए तेजपाल नागर ने जीत हासिल की।
गुर्जर और ब्राह्मणों के विरोध की चर्चा हवा-हवाई
क्षेत्र में पूरे चुनाव यह चर्चा रही कि गुर्जर और ब्राह्मण समुदाय वर्तमान विधायकों से नाखुश है। वहीं जाट समुदाय को पहले से ही विरोध में बताया जा रहा था। लेकिन जेवर और दादरी के दोनों भाजपा प्रत्याशियों को मिले वोटों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जो भी बातें हवा में थीं। वह हवा-हवाई थी। यानी चुनाव के दिन तक इसकी भरपाई किसी तरह से कर ली गई, जो कि वोट में शिफ्ट हो गई।
दलितों के वोटों में भी लगी सेंध
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला परिणाम बहुजन समाज पार्टी को मिले वोटों का रहा। बसपा ने दादरी और जेवर में करीब 90 प्रतिशत दलित वोटों के मिलने का दावा किया गया था। लेकिन यह दावा भी परिणाम के साथ हवा-हवाई रह गया। अगर ऐसा नहीं होता तो चुनाव परिणाम कुछ और होते। लेकिन बसपा प्रत्याशियों को मिले वोटों से यह पता चल रहा है कि उनको दलितों के भी पूरे वोट नहीं मिले। यानी भाजपा ने यहां भी सेंध लगाई। इनकी संख्या दादरी और जेवर में करीब 80 और 73 हजार बताई जा रही थी। लेकिन दलितों के जितने वोट पड़े थे। बसपा प्रत्याशियों के कुल वोट भी उतने नहीं पड़े।
हम तो मोदी-योगी को कर रहे वोट
चुनाव के दिन 10 फरवरी को वोट देने वाले लोगों से जब पूछा गया तो उनका साफ कहना था कि वह तो मोदी-योगी को वोट दे रहे हैं। एक देश के लिए दूसरा प्रदेश के लिए। चाहे प्रत्याशी का विरोध हो रहा हो या नहीं हो रहा हो। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं दिखा। इसका फायदा अब दिख रहा है। साथ ही महिला वोटरों के बढ़े प्रतिशत ने भी भाजपा को बाजी मारने में मदद की।
बढ़े वोट, बढ़ा जीत का अंतर
दादरी विधायक तेजपाल नागर को 2022 में मिले वोट और जीत का अंतर
-218068 वोट मिले, 138218 वोट से हराया
दादरी विधायक को 2017 में 141226 मिले वोट और जीत का अंतर 80177 रहा
जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह को 2022 में मिले वोट और जीत का अंतर
-117205 वोट मिले, 56315 वोटों से हराया
जेवर विधायक को 2017 में 102979 मिले वोट और जीत का अंतर 22173 रहा