नई दिल्ली। सरकारी पोर्टल से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर मतदाता पहचान पत्र बनाने के झांसा देकर 3 माह में 10 हजार लोगों से ठगी की गई। मध्य जिले के साइबर थाना पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान अमरोहा, निवासी अंकित कुमार (26) और मुरादाबाद निवासी मनमोहन सिंह उर्फ टीटू (22) के रूप में हुई है। गिरोह का सरगना पंचकूला निवासी कनव कपूर फरार है। आरोपियों ने 'voteridcard.ebharatseva.in' नामक वेबसाइट बनाई थी। वेबसाइट पर मतदाता पहचान पत्र बनवाने और उसमें सुधार कराने के नाम पर 650 रुपये वसूले जाते थे।
पुलिस उपायुक्त श्वेता चौहान ने बताया कि 10 नवंबर 2021 को रंजीत नगर थाने में एक युवक ने ठगी की शिकायत की थी। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि उसे वोटर आईडी में सुधार कराना था। ऑनलाइन सर्च करने पर उसे सबसे पहले एक वेबसाइट दिखी। वेबसाइट पर सुधार कराने के लिए 650 रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित ने ऑनलाइन की पेमेंट कर दी। इसके बाद दो अलग-अलग वेबसाइट से उसके पास ई-मेल आया। उसे बताया गया कि जल्द ही कस्टमर केयर प्रतिनिधि उससे संपर्क करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जांच करने पर उसे ठगी का पता चला। मामले की जांच साइबर पुलिस थाने को सौंपी गई।
छानबीन में पता चला ठगी की रकम रोजर पेमेंट गेटवे के जरिये ‘टीटू साइबर कैफे’ मुरादाबाद में ट्रांसफर हुए थे। कैफे का मालिक मनमोहन सिंह उर्फ टीटू था। टीम ने मुरादाबाद में दबिश देकर आरोपी मनमोहन को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह अमरोहा निवासी अंकित कुमार की मदद से ठगी कर रहा था। पुलिस ने अंकित को भी अमरोहा से दबोच लिया। पुलिस पूछताछ में अंकित ने बताया कि गिरोह का सरगना कनव कपूर है। कुछ समय पूर्व उसकी नोएडा सेक्टर-58 में उसकी कनव से मुलाकात हुई थी। कनव ने सरकारी नाम से मिलती जुलती वेबसाइट बना ली। इसके बाद मनमोहन के गेटवे से रुपये मंगाकर आपस में बंट लेते थे। अंकित और मनमोहन की गिरफ्तारी की भनक लगते ही आरोपी कनव कूपर पंचकूला स्थित अपने घर से फरार हो गया। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश कर रही हैं।श्
लाखों लोगों से ठगी की आशंका, जांच जारी
पुलिस ने मामले मेें लाखों लोगों से ठगी की आशंका जताई है। आरोपियों के खातों की जांच से पता चला है कि 3 माह के दौरान ही 10 हजार लोगों से ठगी की गई। अंकित अमरोहा के कॉलेज से डिप्लोमा पास है। नोएडा के एक कॉल सेंटर में उसकी मुलाकात कनव से हुई थी। कनव के कहने पर उसने ठगी की वारदात शुरू की। कनव ने ही वेबसाइट बनाई थी।
कई अन्य मॉड्यूल का खुलासा बाकी
पुलिस की पूछताछ में अंकित ने खुलासा किया है कि वोटर आईकार्ड बनाने के पर ठगी जैसे कई और मॉड्यूल हैं। आरोपी कनव ने एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट), ड्राइविंग लाइसेंस, फूड लाइसेंस और फास्ट टैग के लिए भी अलग-अलग फर्जी वेबसाइट बनाई हुई है। उसके लिए अलग-अलग मॉड्यूल काम करता है।
छोटी रकम लेकर करते थे ठगी
पुलिस की पूछताछ में अंकित ने खुलासा किया है कि कनव ने वोटर आईकार्ड बनवाने या उसमें करेक्शन के लिए 650 रुपये की फीस रखी थी। लोग आसानी से इस रकम को दे देते थे। ठगी होने के बाद पुलिस के चक्कर में नहीं पड़ने के लिए पीड़ित शिकायत भी नहीं करते थे। छोटी सी रकम से ही आरोपी पिछले तीन माह के दौरान लोगों से 65 लाख की ठगी कर चुके हैं।