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वकीलों की हड़ताल का 5वां दिन, करोड़ों का नुकसान: नहीं बनी बात, अधिकारियों की मंथन बैठक जारी, समझाने में जुटे

Mon, 15 Jun 2026 02:26 PM IST
Vijay Singh Pundir ऋषभ कौशल, अमर उजाला, नोएडा

सार

पिछले पांच दिनों से वकीलों की हड़ताल के चलते एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। इस बीच सोमवार को भी रजिस्ट्री से जुड़े काम कराने आए लोगों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ा।
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वकीलों की हड़ताल का पांचवां दिन आज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी सरकार के ई पंजीकरण व्यवस्था निजी हाथों में देने के आदेश से शहर के 2 हजार से ज्यादा अधिकवताओं, चाय बनाने वाले से लेकर स्टांप वेंडरों तक की रोजी रोटी पर संकट आने की संभावना है। इसी के विरोध में वकील पांच दिनों से हड़ताल पर हैं।

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दरअसल सरकार की ओर से रजिस्ट्री से जुड़े कामों की ई व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में पहला आवंटन नोएडा प्राधिकरण में एक समर्पित टीम उसे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए रजिस्ट्री के काम करेगी, जो कि सीधा रजिस्ट्री कार्यालय में सिर्फ पंजीकरण के लिए भेजा जाएगा। जबकि उसके पहले तक समर्पित टीम रजिस्ट्री से जुड़े सारे कागजात की समीक्षा करने के बाद ही ऑनलाइन आवेदन करेगी। 

ऐसे में वकीलों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था आई तो रजिस्ट्री कार्यालय में वर्षों से काम काज संभाल रहे करीब 2 हजार से ज्यादा अधिवक्ताओं से लेकर चाय बनाने और स्टाम्प वेंडरों को अपना घर चलाना तक मुश्किल हो जाएगा। इसी विरोध में सेक्टर 33अ स्थित निबंधन कार्यालय में वकील पिछले पांच दिनों से हड़ताल पर बैठे हैं। नोएडा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण डेढ़ा ने बताया कि यह हड़ताल व्यवस्था का निर्णय वापस लिए जाने तक अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। 
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क्या है वकीलों से सवाल जो कर रहे उन्हें परेशान 

  • पहला सवाल :  व्यवस्था के तहत निजीकरण किया जाएगा तो उसका भागतान कौन करेगा ? 
  • दूसरा सवाल : स्टाम्प विक्रेताओं, डीड राइटरों और वकीलों का भविष्य क्या होगा ? 
  • तीसरा सवाल : निजी संस्थानों का कार्यकाल कितना होगा ? 
  • चौथा सवाल : जो नए कर्मचारी होंगे, क्या उन्हें विधिक ज्ञान होगा ? 
  • पांचवा सवाल : यदि गलत दस्तावेज़ बनता है तो किसकी जिम्मेदारी होगी ?

दिनभर भटकते रहे लोग, पांच दिनों से नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री 
बता दें, पिछले पांच दिनों से वकीलों की हड़ताल के चलते एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। इस बीच सोमवार को भी रजिस्ट्री से जुड़े काम कराने आए लोगों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ा।

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