अंबेडकरनगर। किछौछा स्थित हुजूर मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर अब कुरान की आयतों से लिखी चादरों के चढ़ावे पर प्रतिबंध लगाने की पहल शुरू कर दी गई है। यह कदम धार्मिक सम्मान और कुरान की तअजीम को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
खानवाद-ए-अशरफिया से जुड़े सैयद नूरुद्दीन अशरफ ने इस संबंध में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि मजार पर चढ़ाई जाने वाली इन चादरों पर कुरान की आयतें अंकित होती हैं, जो चढ़ावे के बाद अव्यवस्थित ढंग से रखे जाने या फेंके जाने के कारण बेअदबी का कारण बनती हैं।
उन्होंने दरगाह से जुड़े जिम्मेदारों और स्थानीय दुकानदारों से अपील की है कि अब केवल साधारण चादरें ही चढ़ाई जाएं। सैयद नूरुद्दीन अशरफ ने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी 2026 के बाद कुरान की आयतों से लिखी कोई भी चादर मजार पर स्वीकार नहीं की जाएंगी।
खानवाद-ए-अशरफिया के सदस्यों और कमेटी इंचार्ज सैयद सिराज अशरफ ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम कुरान की तअजीम और धार्मिक अदब की हिफाजत के लिए जरूरी है।
इबादत के लिए खाली कराया गेस्टहाउस
हुजूर मखदूम अशरफ की दरगाह पर ज़ायरीन की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सैयद नूरुद्दीन अशरफ (अद्दु मियां) ने अपने गेस्टहाउस को जायरीन की इबादत के लिए खाली करा दिया है। इस गेस्ट हाउस में शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा की गई। सैयद नूरुद्दीन अशरफ ने बताया कि अगहनिया मेले में लगातार बढ़ रही भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह पहल शुरू की गई है।