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सीमा पर जिले के किसानों व फरीदाबाद के भूमाफिया में टकराव की नौबत

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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश व हरियाणा की सीमा पर गौतमबुद्ध नगर के किसानों और भूमाफिया में टकराव की नौबत आ गई है। आरोप है कि फरीदाबाद बॉर्डर पर भूमाफिया फसल नहीं काटने दे रहे हैं और जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से शिकायत कर मदद मांगी है। वहीं, प्रशासन ने मेरठ मंडल के कमिश्नर के निर्देश पर भूमाफिया पर कार्रवाई करने के लिए फरीदाबाद के जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। प्रशासन का कहना है कि किसानों की हर संभव मदद की जाएगी।
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गौतमबुद्ध नगर में अट्टा गुजरान गांव के किसान ओमप्रकाश, ऋषिपाल, अंतराम, राजवीर, जगदीश आदि का आरोप है कि गांव की करीब 1200 बीघा से अधिक जमीन दीक्षित अवार्ड में हरियाणा के मझावली गांव में चली गई थी जो आज भी किसानों के नाम है और उस पर खेती कर रहे हैं, लेकिन दो साल से मझावली गांव के भूमाफिया खेती नहीं करने दे रहे हैं। इस समय जमीन पर गेहूं की फसल खड़ी है। आरोपी फसल को स्वयं काटना चाहते हैं। भूमाफिया की मदद फरीदाबाद की स्थानीय पुलिस प्रशासन भी कर रही है। कई बार पुलिस की गाड़ियां मौके पर आ चुकी हैं। आरोपी गोलियां भी चला चुके हैं। ऐसे में भूमाफिया के कारण बॉर्डर पर टकराव की स्थिति बनी हुई है।
जांच के बाद फरीदाबाद जिलाधिकारी को भेजा पत्र
किसानों ने मेरठ मंडल के कमिश्नर से भी शिकायत कर मदद मांगी थी। कमिश्नर के निर्देश पर एडीएम प्रशासन ने संबंधित एसडीएम को जांच सौंपी। जांच में पता चला कि जमीन किसानों के नाम दर्ज है और इस समय फसल भी खड़ी है। जांच के बाद जिलाधिकारी की तरफ से फरीदाबाद के डीएम को पत्र भेजा गया है। इसमें किसानों को परेशान करने वालों पर कार्रवाई कर फसल की रक्षा करने को कहा गया है।
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दीक्षित अवार्ड में हरियाणा चला गया था मझावली
मझावली गांव बुलंदशहर का हिस्सा था, लेकिन वर्ष 1984 के दीक्षित अवार्ड में यह गांव हरियाणा में शामिल कर दिया गया। वहां के राजस्व रिकॉर्ड में अभी तक गांव को दर्ज नहीं किया गया है। इस कारण यह विवाद खत्म नहीं हो रहा है। अट्टा गुजरान के पास किसानों की जमीन यमुना के किनारे गौतमबुद्ध नगर की तरफ है, लेकिन यह हरियाणा का हिस्सा है। जमीन के मालिक गौतमबुद्ध नगर के किसान हैं जबकि हरियाणा के कुछ भूमाफिया इस पर कब्जा करना चाहते हैं।
क्या है दीक्षित अवार्ड
वर्ष 1974 में केंद्र सरकार ने दोनों प्रदेशों के किसानों के सीमा विवाद को समाप्त करने के लिए जमीन को दीक्षित अवार्ड घोषित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज दीक्षित के नाम पर इसे यह नाम दिया गया। इस अवार्ड के तहत यमुना को ही दोनों प्रदेशों की सीमा मान लिया गया था।
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