-जिले का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा
नोएडा। मौसम में बदलाव जारी है। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद शनिवार को हल्की धूप रही। हालांकि मौसम विभाग ने बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया था। रविवार को मौसम सामान्य रहने की संभावना है। 7 और 8 अप्रैल को बरसात हो सकती है।
आईएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले का अधिकतम तापमान 32.8 और न्यूनतम 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा। 8 अप्रैल के बाद मौसम साफ हो जाएगा ऐसे में तेज गर्मी शुरू हो जाएगी। मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ इस समय उत्तर अफगानिस्तान और आसपास के पाकिस्तान क्षेत्र पर ऊपरी हवा में सक्रिय है जिससे एक गहरी ट्रफ उत्तर अरब सागर तक फैली हुई है। इसके बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ 7 अप्रैल 26 को पश्चिमी हिमालय तक पहुंचेगा। इन दोनों सिस्टम के कारण उत्तर भारत में मौसम काफी सक्रिय रहेगा। इस दौरान रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। दिल्ली एनसीआर में भी इसका असर साफ दिखाई देगा।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
यमुना सिटी/बिलासपुर/रबूपुरा (संवाद)। बरसात और ओलावृष्टि के कारण किसानों का काफी नुकसान हो चुका है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों ने नुकसान का आंकलन करके मुआवजे की मांग की है। शनिवार को किसान पूरे दिन अपने खेतों में बची हुई फसल की देखरेख और संभालने में जुटे रहे। वहीं जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सर्वे कराने की मांग की है। जिससे कि सर्वे के आधार पर किसानों के नुकसान की भरपाई की जा सके और उन्हें मुआवजा दिया जा सके।
किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल पक कर तैयार है। कई जगहों पर कटाई शुरू हो चुकी है और फसलें कटकर खेत में रखी हैं। ऐसे में अगर बारिश होती है तो सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी। दूसरी ओर ईंट भट्ठा उद्योग को भी इससे काफी नुकसान हुआ है। खुले मैदान में रखी लाखों कच्ची ईंट बारिश के कारण गल गईं। खेत में पानी भरने से कच्ची ईंटों की पूरी रैक जमीन पर आ गिरा। बिलासपुर में 100 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं।
जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे ने बताया कि बारिश और ओले के कारण हुए फसल के नुकसान का सर्वे के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। सरकार के निर्देश आने पर सामूहिक रूप से सर्वे कराया जाएगा। वहीं फसल बीमा में रजिस्टर्ड किसान खुद शिकायत दर्ज कराकर अपनी फसल का सर्वे करा सकते हैं। किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर शिकायत देनी होगी। किसान एसडीएम, तहसीलदार और जिलाधिकारी को इस मामले में शिकायत दे सकते हैं।