शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलाव अब शहर से गांव तक नजर आने लगे हैं। डिजिटल युग में आठवीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थी अब मोबाइल पर एप के माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऑनलाइन ट्यूशन का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का तरीका भी बदल रहा है।
कोरोना काल के बाद शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई धीरे-धीरे विद्यार्थियों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। अभिभावक भी मान रहे हैं कि मोबाइल एप और ऑनलाइन ट्यूशन से बच्चों को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। शहर ही नहीं, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्मार्टफोन और इंटरनेट की सुविधा के चलते विद्यार्थी डिजिटल प्लेटफार्म से पढ़ाई कर पा रहे हैं। तमाम शैक्षिक एप उपलब्ध हैं, जिनके सब्सक्रिप्शन लेकर विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक के लिए इन ऑनलाइन कक्षाओं का सहारा ले रहे हैं। रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर और लाइव इंटरेक्टिव क्लास से छात्रों को अपने संदेह दूर करने का मौका भी आसानी से मिल रहा है। जनपद में इसका प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है।
ग्रामीण विद्यार्थियों को अधिक सहूलियत
ग्रामीण अभिभावकों का कहना है कि पहले उन्हें ट्यूशन के लिए बच्चों को शहर भेजना पड़ता था, लेकिन अब घर बैठे मोबाइल पर ही पढ़ाई संभव हो रही है। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है। कुछ दिक्कत हैं, लेकिन सुविधा भी है।
ऑनलाइन पढ़ाई एक नई दिशा है, जो समय और स्थान की बाधाओं को खत्म करती है। इसके साथ ही मोबाइल पर अत्यधिक समय बिताने से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। बदलते वक्त के साथ बदलना भी जरूरी है।
-सारिका शर्मा, अभिभावक।
मैं बच्चों को खुद पढ़ातीं हूं, लेकिन ऑनलाइन ट्यूशन से बच्चों को काफी मदद मिलती है। बदलते दौर में हम बच्चों को मोबाइल से दूर नहीं रख पा रहे, इसलिए ध्यान देना होगा कि बच्चा मोबाइल पर पढ़ाई ही करें, उसका दुरुपयोग न करें।
-दिव्या अग्रवाल, अभिभावक।