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पंजाब जीतने के जश्न में छुपा यूपी की हार का गम

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नोएडा (योगेश शर्मा)। मुफ्त बिजली और रोजगार को मुद्दा बनाकर विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में खाता भी नहीं खोल सकी। दिल्ली का फॉर्मूला फिट न होने से जिले की तीनों सीटों पर पार्टी को मुंह की खानी पड़ी। नोएडा और दादरी सीट पर पार्टी के प्रत्याशी पांचवें नंबर पर रहे, जबकि जेवर सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने आप के प्रत्याशी को पछाड़ दिया। हालांकि, यूपी में हार का गम छुपाने के लिए पार्टी की जिला इकाई ने पंजाब में जीत की खुशी का जश्न मनाकर कार्यकर्ताओं का हौसला संभाले रखने का प्रयास किया।
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इस बार उत्तर प्रदेश में आप ने भाजपा से ज्यादा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। मसलन, भाजपा ने करीब 370 सीटें तो आप ने करीब 380 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। घोषणा पत्र को केजरीवाल गारंटी पत्र नाम देकर प्रदेश में महिलाओं को फ्री बस यात्रा, 300 यूनिट फ्री बिजली, पुराने बिल माफ, पुरानी पेंशन बहाली, किसानों का कर्ज माफ, बेरोजगारी भत्ता सहित 26 वादे कर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
गौतमबुद्ध नगर की तीनों सीटों की बात करें तो नोएडा में प्रत्याशी पंकज अवाना 6545 वोट लेकर लेकर पांचवें स्थान पर रहे। दादरी सीट पर भी 4613 वोट के साथ पार्टी प्रत्याशी संजय पांचवें स्थान पर रहे, जबकि जेवर सीट में पार्टी प्रत्याशी को महज 589 वोट मिले। यहां आप प्रत्याशी पूनम से ज्यादा वोट निर्दलीय प्रत्याशी वीर सिंह ओर सुनील गौतम ने हासिल किए। वहीं, मतगणना के बीच बृहस्पतिवार दोपहर पार्टी के सेक्टर-18 स्थित कार्यालय पर पंजाब में जीत का जश्न मनाया गया। ढोल नगाड़ों की थाप पर कार्यकर्ता झूमे और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई।
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‘आप’ को अपनों ने दिया धोखा
जिले की तीनों सीटों पर विरोधी दलों के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर देने का सपना देख रहे आप प्रत्याशी को उनके अपनों से ही धोखा मिला। चुनाव से पहले सदस्यता लेने वालों के वोट भी पार्टी के समर्थन में नहीं पड़े। सबसे पहले चुनाव प्रचार शुरू करने वाली आप चुनावी नतीजों में बुरी तरह से पिछड़ गई। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार जिले में सदस्यता अभियान चलाकर एक लाख से ज्यादा सदस्य बनाए गए। नतीजों पर नजर डालें तो जिले की तीनों सीटों को मिलाकर सदस्यों की तुलना में 10 फीसदी वोट भी नहीं मिले।
जन्मभूमि पर भी नहीं चला जादू
अन्ना आंदोलन से लेकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने तक के इस सफर में नोएडा की अहम भूमिका रही है। 12 अगस्त 2012 को टीम अन्ना भंग होने के बाद इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के बैनर तले पहली बैठक बुलाई गई। सेक्टर-14 स्थित सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण के निवास पर मीडिया से मुखातिब अरविंद केजरीवाल ने पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा की, लेकिन पार्टी का नाम तय नहीं था। नाम की घोषणा से अगले ही दिन 25 नवंबर 2012 को नोएडा में ही पार्टी की पहली कार्यकारिणी की बैठक हुई, जिसमें अरविंद केजरीवाल को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया। दिल्ली से सटी नोएडा सीट पर पार्टी को मजबूत माना जा रहा था, लेकिन नतीजे कुछ और ही निकले।
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