जिला अस्पताल में तरन्नुम को लेकर परेशान परिजन।
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में 18 वर्षीय तरन्नुम दो घंटे तक तेज बुखार और दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी ने उसका हाल नहीं पूछा। इस दौरान उसकी हालत ज्यादा नाजुक होती चली गई। परिजन इलाज के लिए डॉक्टरों व कर्मचारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। अचानक युवती के बेहोश होने पर लोगों ने उसे ओपीडी में अंदर पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने सिर्फ पर्चा देखकर परिजनों को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया। हालांकि, बाद में युवती को सरकारी एंबुलेंस से ग्रेनो स्थित जिम्स भेजा गया।
हरौला निवासी मोहम्मद खुर्शीद आलम ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह करीब 11 बजे बेटी तरन्नुम को लेकर जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड पहुंचे थे। जहां से उन्हें ओपीडी नंबर 6 में भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि बेटी चल भी नहीं पा रही थी, लेकिन उन्हें व्हील चेयर नहीं मिली। इस पर वह बेटे की मदद से बेटी को ओपीडी तक लेकर पहुंचे। जहां लंबी लाइन में इंतजार पड़ा। बेटी की हालत खराब होने पर उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से इलाज की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।
काफी देर बाद वह डॉक्टर के पास पहुंच तो उन्होंने पर्चा देखते ही दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दिल्ली में डाक्टरों की हड़ताल होने के कारण परिजनों ने कहीं और रेफर करने की विनती की। तब जाकर बेटी को जिम्स रेफर किया गया। खुर्शीद ने बताया कि रेफर करने के बाद उन्हें एंबुलेंस के लिए भी काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। करीब 42 किमी दूर से एंबुलेंस अस्पताल पहुंची, तब वह बेटी को लेकर जिम्स रवाना हुए। सीएमएस डॉ. सुषमा चंद्रा ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। अस्पताल प्रशासन से इसकी पूरी जानकारी लूंगी। जिससे चूक हुई है, उससे जवाब मांगा जाएगा। मैं खुद इस मामले को देखूंगी। आगे से ऐसा नहीं हो, यह भी सुनिश्चित करूंगी।