ग्रेटर नोएडा। प्रदेश सरकार ने बिल्डरों की कुर्क संपत्ति की ई-नीलामी कराने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी सुहास एलवाई को दी है। शासनादेश मिलने के बाद प्रशासन ने करीब 380 करोड़ रुपये की संपत्ति को ई-नीलामी कराने की तैयारी शुरू कर दी है। नोएडा और ग्रेनो प्राधिकरण के साथ मिलकर प्रशासन प्रक्रिया पूरी करेगा। प्रशासन ने मार्च में पहली ई-नीलामी कराने का लक्ष्य रखा है।
उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी) के रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) के करीब 1400 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसमें से 600 करोड़ से अधिक की आरसी जिला प्रशासन के पास है। प्रशासन की टीमें लगातार बिल्डरों से वसूली का प्रयास कर रही हैं, लेकिन सफलता हासिल नहीं मिल रही है। इस कारण प्रशासन ने बिल्डरों की संपत्ति कुर्क करने का फैसला लिया है। दादरी और सदर तहसील की टीमें अभी तक करीब 400 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर चुकी है, लेकिन नीलामी न होने से बकाया अटका हुआ है।
प्रशासन के प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार ने ई-नीलामी की मंजूरी दी थी। इससे उम्मीद है कि देश के अलग-अलग कोने में बैठे लोग ई-नीलामी में भाग ले सकेंगे। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद प्रशासन ई-नीलामी कराने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अभी तक जिम्मेदारी तय नहीं थी। अब प्रदेश सरकार ने गौतमबुद्ध नगर में ई-नीलामी कराने के लिए जिलाधिकारी को अधिकृत किया है। शासनादेश मिलने के बाद प्रशासन तैयारियों में जुट गया है।
मार्च में पहली ई-नीलामी कराने का लक्ष्य
जिला प्रशासन ने मार्च में पहली ई-नीलामी कराने का लक्ष्य रखा है। अफसरों ने बताया कि पहले चरण में 380 करोड़ की संपत्ति को ई-नीलामी करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसकी शुरुआत कुछ संपत्ति से होगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के साथ मिलकर ई-नीलामी को पूरा किया जाएगा। इसका एक ड्रॉफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें नियम और शर्तें शामिल होंगी। जल्द ही पहली ई-नीलामी की जाएगी।
309 संपत्ति की जा चुकी हैं कुर्क
दादरी व सदर तहसील की टीमें अभी तक 44 बिल्डरों की 309 संपत्ति को कुर्क कर चुकी हैं। इनमें विला, फ्लैट, भूखंड आदि शामिल हैं, जो 380 करोड़ रुपये के हैं। इस संपत्ति की ई-नीलामी होने के बाद खरीदारों को उनका पैसा मिल सकेगा। इसी मकसद से प्रशासन तैयारी में जुटा है।