नोएडा। ट्विन टावर गिरानेे से पहले आसपास की इमारतों का संचरनात्मक विश्लेषण किया जाएगा। इमारत को गिराने वाली एडिफिस कंपनी ही इमारत की संरचना का अध्ययन कर प्राधिकरण को रिपोर्ट भेजेगी। वहां से यह रिपोर्ट रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) क ो भेजी जाएगी। रिपोर्ट ओके मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेक्टर-93ए में सुपरटेक की एमरॉल्ड कोर्ट स्थित ट्विन टावर को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मुंबई की एडिफिस कंपनी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के कर्मचारी और विशेषज्ञ भी नोएडा स्थित ट्विन टावर साइट्स पर पहुंच चुके हैं। फिलहाल यहां श्रमिकों केरहने के लिए अस्थायी तौर पर निर्माण किया जा रहा है। गेट आदि लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। अब किसी भी दिन मशीनें व अन्य उपकरण साइट पर पहुंचाए जा सकते हैं।
उधर, नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार इसमें देखा जाएगा कि आसपास की इमारतों की हालत क्या है। ट्विन टावर को विस्फोट से गिराया जाना है। ऐसे में यह देखा जाएगा कि इन धमाकों से होने वाले कंपन से कहीं किसी भवन को नुकसान तो नहीं होगा। इस संचरनात्मक विश्लेषण की रिपोर्ट एडिफिस कंपनी की ओर से प्राधिकरण के माध्यम से रुड़की स्थित सीबीआरआई को भेजी जाएगी।
आरडब्ल्यूए ने शुरू कराया स्ट्रक्चरल ऑडिट
नोएडा। ट्विन टावर धवस्तीकरण के दौरान होने वाले विस्फोट और कंपन से होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाने के लिए एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए ने सोसाइटी के 15 टावर का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना शुरू कर दिया है। इन 15 टावर में करीब 730 परिवार रहते हैं। इसके साथ ही एमराल्ड कोर्ट पहली अपने टावरों में स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने वाली पहली सोसाइटी बन गई है। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहे हैं। ब्यूरो