अमर उजाला अभियान: बेसिक शिक्षा
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जैसे-तैसे कंप्यूटर लैब बनी पर सीखने का सपना अभी भी अधूरा
-जिले के 80 बेसिक स्कूलों में सीएसआर के माध्यम से बनवाई गई थी कंप्यूटर लैब
-शिक्षा विभाग तैनात नहीं कर सका विशेषज्ञ शिक्षक, निजी कंपनियों पर ही निर्भर लैब
-बच्चों के कंप्यूटर ज्ञान में बिजली भी बनी बाधा, स्कूल के समय गायब रहती है बिजली
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा/ ग्रेटर नोएडा/जेवर/दादरी/दनकौर। एक तरफ सरकार तकनीकी शिक्षा पर जोर दे रही है, वही दूसरी ओर बेसिक स्कूलों में कंप्यूटर की व्यवस्था कराने पर सरकार का जोर नहीं है। जिला प्रशासन ने निजी कंपनियों व कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड की मदद से 80 स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित कराई है, लेकिन उनके संचालन की व्यवस्था चरमरा गई है। दरअसल, कंप्यूटर लैब निजी कंपनियों के कंप्यूटर शिक्षकों पर निर्भर है। जब शिक्षक स्कूल आते हैं, तभी कक्षाएं संचालित होती हैं। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग के पास कोई विशेषज्ञ शिक्षक नहीं है। कभी-कभी विज्ञान व गणित के शिक्षक ही कंप्यूटर की कक्षा संचालित करते हैं। यही नहीं, स्कूलों के सामने बिजली आपूर्ति भी बड़ी समस्या है।
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511 में से केवल 80 तक पहुंच सके कंप्यूटर
जिले में बेसिक स्कूलों की संख्या 511 है, लेकिन कंप्यूटर लैब मात्र 80 में है। शिक्षा विभाग अनुदेशक शिक्षक होने का दावा कर रहा है, लेकिन उनके पास भी कंप्यूटर कोर्स की डिग्री या सर्टिफिकेट नहीं है। वो केवल विज्ञान व गणित के विशेषज्ञ है। ऐसे में शिक्षकों के आभाव में बच्चों को कंप्यूटर का ज्ञान नहीं मिल पा रहा हैं। जेवर के साबौंता, खाजपुर, जेवर गांव के परिषदीय स्कूलों में एनजीओ कंप्यूटर लैब चला रहे है।
सांसद ने कंप्यूटर लगवा दिए पर शिक्षक का इंतजार
जेवर के 115 स्कूलों में से 30 स्कूलों को कंपोजिट विद्यालय बना दिया गया। यहां 85 स्कूल प्राथमिक स्कूल है। इनमें से जेवर के लौदोना जूनियर हाईस्कूल व जेवर के नई बस्ती बैना रोड स्कूल में सांसद के प्रयास से कंप्यूटर लैब बनी, लेकिन शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। आज भी कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। बच्चों के काम नहीं आ रहे हैं।
स्कूल में कंप्यूटर है पर बिजली नहीं
जिन 80 स्कूलों में कंप्यूटर लैब बनी है। वो ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल है। वहां कंप्यूटर लैब तो बन दी गई, लेकिन बिजली आपूर्ति की उचित व्यवस्था नहीं की गई। कुछ जगह पर इंवर्टर लगे हैं, लेकिन वो काफी नहीं है। प्राथमिक शिक्षा संघ के पूर्व अध्यक्ष मेघराज भाटी ने बताया कि स्कूल समय में बिजली नहीं होती है। ऐसे में कैसे कंप्यूटर चलेंगे।
कंप्यूटर सीखना चाहते हैं बच्चे पर सुविधा नहीं
दादरी ब्लॉक के ज्यादातर स्कूलों में कंप्यूटर लैब नहीं है। वहां के बच्चे कंप्यूटर सीखना चाहते हैं, लेकिन उनको सुविधा नहीं मिल रही है। यहां पर दादरी, चिटहेरा व कटहैरा गांव के बेसिक स्कूलों में सीएसआर के माध्यम से कंप्यूटर लैब बनी है। बाकी सादोपुर, धूम मानिकपुर, नूरपुर, घोड़ी बछेड़ा, रसूलपुर, जमशेदपुर, खटाना, रुपवास, आमका, कल्दा, महावड़ आदि गांवों के स्कूलाें के बच्चे कंप्यूटर लैब मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
स्मार्ट क्लास में सोनभद्र जिले से भी पीछे
पिछले दिनों एक रिपोर्ट जारी हुई थी, जिसमें स्मार्ट क्लास के मामले में जिले की स्थिति सोनभद्र और चित्रकूट से भी रही। पर्याप्त मात्रा में सीएसआर व दूसरे जिलों की तुलना में कम स्कूल होने के बाद भी करीब 80 स्कूलों में ही स्मार्ट कक्षाएं हैं। जबकि प्रदेश में 10 जिलों में यह आंकड़ा 300 से अधिक पहुंचा है।
स्कूलों में प्रोजेक्टर लगे पर कंप्यूटर नहीं
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां पर प्रोजेक्टर लग गए हैं, लेकिन कंप्यूटर नहीं हैं। शिक्षकों ने बताया कि प्रोजेक्टर चलाने के लिए खुद का लैपटॉप लेकर आ रहे हैं। खासतौर पर उच्चाधिकारी आते हैं तो लैपटॉप लाने के निर्देश दिए जाते हैं। कायाकल्प- 5 की रिपोर्ट में भी जिला सबसे खराब स्थिति वाले जिलों में शामिल था।